रोचक और ज्ञानवर्धक कृति- पेड़ लगाओ

0 0
Read Time7 Minute, 21 Second

 

कविता लिखना जितना आसान समझा जाता है उतना होता नहीं है। कवि को तात्कालिक परिस्थितियों का गहन अध्ययन करना पड़ता है, उन स्थितियों से जुझना पड़ता है। तब जाकर किसी रचना का निर्माण होता है। और फिर बाल साहित्य, बाल कविताओं का सृजन करना और भी कठिन कार्य है। जहां आजकल बड़े अखबारों से साहित्य का पेज लगभग खत्म सा हो गया है वही बाल साहित्य प्रकाशित करने वाले दैनिक अख़बारो की गिनती नगण्य है। ऐसे समय में बाल साहित्य के लिए तन- मन- धन से समर्पित होकर कार्य कर रहे हैं लब्ध प्रतिष्ठित बाल साहित्यकार राजकुमार जैन राजन, उनकी सद्य प्रकाशित कृति पेड़ लगाओ रोचक तो है ही ज्ञानवर्धक भी है । इस कृति में 85 रचनाएं संग्रहित है।

IMG_20181130_184722

पूर्व में भी उनकी डेढ़ डर्जन से अधिक बाल साहित्य कृतियां प्रकाशित हो चुकी है यह कृति पेड़ लगाओ पूर्णत मौलिकता लिए हुए है । साथ ही विषय की विविधता भी इसमें झलकती है। बाल सुलभ जिज्ञासा उनकी सहज प्रश्नानुकुलता, मासूम शिकायतें, मस्ती को भी जगह-जगह स्थान मिला है। कवि ने कहीं भी अपने विचार बालकों पर थोपने का प्रयास नहीं किया। जो सहज है, सरल है और बालक की जिज्ञासा हे वही रचना आधार है। इन रचनाओं में यह बात बहुत अच्छी है कि यह जमीन से जुड़ी और वास्तविकता के आधार पर रखी गई है साहित्य की क्षेत्र में कविताएं ऐसी विधा होती है जिसे बहुत कम शब्दों में ज्यादा जानकारी के साथ याद रखा जा सकता है।

इस कृति की एक रचना “अच्छी लगती है बरसात” में कवि ने कहा है

नहीं देखती जात और पात

जल बरसाती है एक साथ

इंद्र धनुष के रंग है सात

अच्छी लगती है बरसात।।

सामाजिक समरसता का उदाहरण बरसात के माध्यम से देने का अच्छा प्रयास इस रचना में हुआ है । भारतीय जन मानस में पंचतंत्र की कहानियां लोगों के दिलों दिमाग पर इस तरह छाई हुई है कि उन से विमुक्त नहीं हुआ जा सकता है, स्थिति और परिस्थिति के अनुसार उनमें विविध प्रयोग रचनाकार करते आए जिसे कृति की एक रचना “शेर की शादी”-

बब्बर शेर की शादी में

जंगल में मंगल छाया

हाथी भालू नाचे जमकर

गधा मंडली ने गाया

बड़ी सलोनी सुघर दुल्हनिया

शेर संग बैठी शर्माए

जंगल के सब जानवरों को

भाभी जी सबके मन भाए

झूम झूम कर ऊट मंडली

डिस्को नाच दिखाएं

था जिराफ के हाथ चक्र

और चवर बाघ डुलाए

बड़ी खुशी से शकल बराती

समधी के घर जाते

पकवानों के थाल बहुत से

छक छक कर सब खाते।

लोकतंत्र की एक व्यवस्था चुनाव इसे भी जंगल के माध्यम से कहने का कवि ने प्रयास किया- जब चुनाव में खड़े हो गए

मिस्टर गर्धभ दास

सभी जानवरों के घर जाकर

करते मन की आस

सोचा गर्धभ दास ने

ठाठ- बाट हो जाएंगे

आज सभी सारा जंगल का

हजम हमीं कर जाएगे

आज के बच्चों की सबसे बड़ी समस्या “बस्ते का बोझ” उस पर कवि कहता है

तुम्ही बताओ मुझको

कैसे विद्यालय मैं जाऊं

बोझा बस्ते का है भारी

उठा नहीं मैं पाऊं

सब मुझसे कहते रहते है

अच्छे बच्चे रोज पढ़ते रोज

लेकिन भय्या मुझसे ज्यादा

मेरे बस्ते का है बोझ

नहीं समझता कोई आखिर

क्यों मेरी मजबूरी

रट्टू तोता बनने से अच्छा

शिक्षा होती पूरी

थोड़ी समझ बड़ों को दे दो

ओ मेरे प्यारे भगवान

बस्ता हल्का करवा दो तो

पढ़ना हो जाए आसान ।

इस कृति में प्यारे गांव का दृश्य दिखाती एक रचना आज के युग में शहरी बच्चों को कोरी कल्पना ही लगेगी, लेकिन जिन्होंने गांव में अपना जीवन जीया है जो बच्चे आज भी गांव में रहते हैं वे काफी हद तक इस रचना के आसपास अपने जीवन को महसूस करते है। माना कि अब गांव बदल चुके है लेकिन कुछ स्थिति या आज भी वैसी ही है।

कोयल की मीठी बोली

पक्के रंगों की होली

गांव की कच्ची राहों पर

भींगे बच्चों की टोली

और सने मिट्टी के पांव

हमको प्यारे लगते गांव।

बच्चों की लंबी सी रेल

गिल्ली डंडे का वो मेल

खेतों में पकड़ा पकड़ी

आंख मिचौली का वह खेल

पहलवान के दिखते दांव

हमको प्यारे लगते गांव ।

कृति की शीर्षक रचना “पेड़ लगाओ” में कवि ने कहा है-

बात पते की खुद भी समझो

और सभी को समझाओ

अगर चाहिए शुद्ध हुआ तो

इस धरती पर पेड़ लगाओ

धूल,धुआ जहरीली गैस

पी जाती है सारी

शुद्ध आक्सीजन हमको देकर

रक्षा करें हमारी

अपने सर पर धूप झेलकर

सबको देता छाया

अपना फल देता दूजो को

स्वयं कभी ना खाया

पेड़ो के कितने ही गुण है

इनकी महिमा न्यारी

इनकी देखभाल रक्षा की

सब की जिम्मेदारी ।

क्योंकि कवि मेवाड़ से है, राजस्थान की धरती की गंध भी इनकी कविताओं से आती है, कवि की रचनात्मक क्षमता अपार है उनका सृजन और लेखन मुख्य रुप से बच्चों के आसपास रहा है । कृति का रचनाओ का बाल साहित्य क्षेत्र में सभी जगह उल्लेख होगा। इस कृति की रचनाएं बच्चों के साथ-साथ तरुण और युवा वर्ग को भी आकर्षित करती है। बाल साहित्यकार राजकुमार जी जैन राजन का कविता संग्रह पेड़ लगाओ निश्चित बाल साहित्य जगत में अपना स्थान बनाएगा, कई नामचीन हस्तियों के आशीर्वाद शुभकामनाएं इस कृति को प्राप्त हुए हैं ।

कृति- पेड़ लगाओं(बाल कविताएँ)

रचनाकार- राजकुमार जैन राजन

प्रकाशक- अयन प्रकाशन नई दिल्ली

मूल्य-250/-

समीक्षक- संदीप सृजन, उज्जैन 

 

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

दलितों पर जिहादी अत्याचारों पर लगे लगाम, जागे बिहार सरकार : विहिप

Wed Jun 12 , 2019
नई दिल्ली। आजादी के 72 वर्ष बाद भी भारत में अभी तक दलित समाज पर अत्याचार की दुर्भाग्य जनक घटनाएं होती हैं. विश्व हिन्दू परिषद् के संयुक्त महासचिव डॉ सुरेन्द्र जैन का कहना है कि इन घटनाओं के विरोध में आवाज उठनी ही चाहिए व पीड़ित व्यक्ति को न्याय मिलना […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।