एक माँ की दूजी माँ ने सुन ली पुकार….

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shubham

हे मेरे जगत कल्याण से भरी हुई अंतरात्मा और भावी सिद्ध परमात्मा…मेरे आराध्य गुरुदेव।

तुम्हें आज तक कितनी माँ ने पुकार लगाई और तुमने भी माँ की भाँति ही उन सब पर स्नेह की थपकी देकर उन्हें आत्मकल्याण की ओर सन्मुख कर दिया। कभी तुम्हें पुकार लगाई हम मनुष्यों की जन्मदात्री माँ ने, कि भगवन् मेरा पुत्र संसार में अनन्तकाल की भटकन के दुःख से ग्रसित है,इसे बचा लीजिए,स्वामिन्,इसे बचा लीजिए …।तब मेरी माँ ने उन्हें अपनी शरण देकर आत्मकल्याण का पथ दे दिया। कभी संसार में करुणा की मूरत गौ माँ ने जो स्वयं सब पर वात्सल्य की छाँव बिखेरती है वह भी मानव के भक्षक बनने के कारण तुम्हें पुकारने लगी कि गुरुदेव हमारी रक्षा कीजिए। इन मनुष्यों को सद्बुद्धि दीजिए और मेरी माँ तुमने दयोदय गौशाला से उन्हें और उनकी पीढ़ियों को संरक्षित कर दिया। यही नहीं,गुरुवर ने उनके संवर्धन के माध्यम से हम मनुष्यों के लिए विदेशी वस्तुओं जंक फूड आदि से बचाने के लिए शांतिधारा दुग्ध योजना का प्रचलन किया,जिससे हमें न केवल शुद्ध दूध,दही,घी आदि की उपलब्धि मिली, बल्कि अनगिनत भारतीय परंपराओं को भी जीवन्त किया ।
फिर कभी पुनः मनुष्यों की माँ ने पुकार लगाई कि गुरुदेव मेरा बालक संसार की आधी-व्याधियों से तड़प रहा है,गुरुदेव इनकी पीड़ा को कम कर दीजिए,तब मेरी माँ ने इन्हें भाग्योदय तीर्थ के निर्माण से निष्फिकर कर दिया कि जाओ व्यसनों से बचकर सदा धर्म की शरण लेते रहना।
फिर पुनः आवाज देती है मानव की माँ.. कि, गुरुवर मेरी नन्हीं-नन्हीं बेटियाँ अपने पथ से च्युत हो रही हैं, पाश्चात्यता का अंधानुकरण कर ये अपने जीवन को पतित कर रही है,तब मेरी माँ ने उन्हें *प्रतिभास्थली रूपी नवीन माँ सौंप दी,जिसमें हजारों माँ बड़े वात्सल्य से उनके जीवन को सत्दिशा प्रदान कर रही है और वही बेटियाँ मंगलाएं कहलाने लगी हैं, सबका मंगल करने जो लगी हैं।
इस बार आवाज मनुष्यों के पिता ,कि भगवन ये मेरा पुत्र जीविका उपार्जन के लिए न जाने किन-किन चीजों का सहारा ले रहा है तो कभी व्यर्थ ही जीविका के अभाव में रो रहा है। बस इस बार भी मेरी माँ ने हथकरघा योजना के माध्यम से सदा-सदा के लिए न केवल उन्हें रोजगार दिया, बल्कि बहुमूल्य और प्राचीन संस्कृति को संरक्षित किया। मेरी माँ जब-जब तुम्हें आवाज दी है,मेरी भारतीय वसुंधरा और अनगिनत माँओ ने,तुमने सदैव उनके लिए कल्याण का मार्ग दिखाया है। चाहे तीर्थो का उद्धार हो, चाहे मानव हित में प्रेरणात्मक सृजन हो,चाहे पशुओं का संरक्षण हो,सदैव तुम्हारा वात्सल्य हमें मिला है। बाकी का वर्णन करने में असमर्थ हूँ,क्योकि मेरी क्षमता अल्प है जो सूर्य को दीपक नही दिखा सकती।

                                                                              #शुभम जैन

परिचय : माँ पूर्णमति जी भक्त परिवार से आप धार्मिक गतिविधियों में जुड़े हैं। मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले के पृथ्वीपुर में शुभम जैन रहते हैं। सिर्फ २१ वर्ष के होकर शुभम जैन अध्ययन के साथ ही टीकमगढ़ में जैनाचार्य श्री विद्यासागर पाठशाला का संचालन भी करते हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।