घर आई लक्ष्मी

0 0
Read Time5 Minute, 33 Second
neha sharma alvar
“बधाई हो माजी लड़की हुई है” दरवाजे के पास ही बैठी हुई शैला से नर्स आकर कहती है।
“क्या फिर से लड़की है?”
 यह कहते हुए शैला के लफ्ज उसके गले में ही अटक जाते हैं। वह रूआसी-सी होकर नर्स की तरफ देखती है। मुस्कुराती हुई नर्स का चेहरा शैला के हृदय को चूर-चूर कर रहा था। मानो वह भी शैला के घर दूसरी पोती के जन्म पर उसे नकली हंसी दिखा कर उसके भाग्य पर चुटकी ले रही हो।
तभी शैला का बेटा नमन अपनी बड़ी बेटी के साथ वहां आता है। माँ का उतरा हुआ चेहरा देखकर नमन को आभास हो जाता है कि फिर से उनके घर बेटी ही हुई है। माँ बेटे एक साथ बैठे हुए अपनी किस्मत पर तरस कर रहे थे। तभी उन्हें कमरे के अंदर से जोर-जोर की हंसी की आवाज सुनाई देती है। शैला और नमन दोनों कमरे की तरफ झांकते हैं और देखते हैं कि उनकी बड़ी बेटी डॉक्टर और नर्स को चॉकलेट बांट रही हैं।
शैला – “अरे लड़की तू ये क्या कर रही है और तू यह मिठाई क्यों बांट रही है? हमारे घर बेटी हुई है बेटा नहीं। और लड़कियों के पैदा होने पर ज्यादा खुशियां नहीं मनाया करते हैं।”
 यह कहते हुए शैला अपनी पोती की हाथ से चॉकलेट की थैली छीन लेती है। छोटी पोती उदास होकर कभी अपनी माँ को तो कभी अपनी दादी को देखती है।
अपनी भोली- सी आवाज में कहती है- “पापा ये बेटियों के जन्म पर मिठाईयां क्यों नहीं बांटी जाती है। क्या वे इंसान नहीं। दादी इतनी क्यों उदास है कि उनके घर दूसरी लड़की आई है। पापा जब मेरा जन्म हुआ था क्या तब भी दादी इतनी ही उदास हुई थी। पापा लोग लड़कियों के जन्म पर ही दुखी क्यों होते हैं।”
 बेटी के इन सभी सवालों ने नमन को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि “आखिर वे अपनी ही संतान की जन्म पर इतना क्यों दुखी हो रहे हैं। क्योंकि वह संतान बेटा नहीं बेटी है इसीलिए। जब वे ही अपनी संतान के जन्म पर इस तरह दुखी होकर बैठ जाएंगे तो लोगों को तो पूरा हक होगा उनका मजाक बनाने का और आज के वक्त में तो लड़कियां किसी भी क्षेत्र में लड़कों से कमजोर नहीं है या फिर कहे तो लड़कियां कभी कमजोर थी ही नहीं बस उनके पास मौका नहीं था या हम जैसे लोगों ने उन्हें  मौका मिलने ही नहीं दिया।यह लड़कियां हमारे परिवार का भविष्य हैं और मैं पूरी कोशिश करूंगा कि उन्हें एक उज्जवल भविष्य देख कर इनके पंखों को उड़ने का मौका दूं।”
यह सोचती हुए नमन अपनी नवजात बेटी को गोद में उठाकर देर तक निहारता है और पास ही में खड़ी शैला अपने हाथ में रखी चॉकलेट की थैली से चॉकलेट निकालकर सभी का मुंह मीठा करवाती हुई अपनी पोती को गले से लगा लेती है। और एक बार फिर से पूरे कमरे में हंसी की लहर दौड़ जाती है।
परिचय 
नाम – नेहा शर्मा।
माता – मन्जू शर्मा।
पिता – कृष्ण कुमार शर्मा।
शिक्षा – स्नातक वर्ष में अध्ययनरत।
विधा – कहानी,कविता,लघुकथा,आलेख।
प्रकाशित रचनाएँ –  “शब्द-सरोकार”, “शुभ तारिका”, “जगमगदीप ज्योति”, “लघुकथा कलश”, “हरियाणा प्रदीप” “अनुभव पत्रिका”, “रचनाकार”, “मातृभारती”, “प्रतिलिपि” में प्रकाशित रचनाएँ।
पुरस्कार – शुभ तारिका से प्राप्त “श्रद्धा पुरस्कार”।
 “माई वीडियो स्टोरी कॉन्पिटिशन” में पुरस्कृत रचना। 
“मोरल स्टोरी स्पर्धा” में पुरस्कृत रचना।
लेखन उद्देश्य – लिखने का उद्देश्य केवल मन को आनंदित करना नहीं है। बल्कि लिखने का ध्येय तो समाज में कुछ ऐसे नव परिवर्तन करने का है, जो लोगों के दिल और दिमाग को अंदर तक प्रभावित करें। अगर मेरे द्वारा लिखी हुई रचनाओं से समाज में अंशतः भी परिवर्तन संभव हो सके, तो मैं अपनी साहित्यिक सेवा को सफल समझ सकूँगी। मेरी तो असीम कृपालु मां शारदे से यही प्रार्थना है कि वह हर साहित्यकार की कलम को इतनी ताकत प्रदान करें कि समाज में नव परिवर्तन के लिए एवं किसी भी बुराई को समाप्त करने के लिए कोई हथियार उठाने की आवश्यकता ना पड़े। वह स्वतः ही कलम की ताकत से नष्ट हो जाए। अगर ऐसा सम्भव हो सके तो हर रचनाकार अपने जीवन को धन्य मान सकेगा।अलवर (राजस्थान) 

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

संकल्प

Mon Apr 22 , 2019
धानी चूनर आज ओढ़ाकर,  धरती की लाज बचाएँ हम | पर्यावरण सुरक्षित रखकर, प्रदूषण दूर भगाएँ हम | हरी -भरी जब रहे वसुंधरा, देती जीवन दान है | समृद्धि हर ओर है होती, होती होठों मुस्कान है | एक -एक मानव पेड़ लगाकर, हरियाली आज बचाले जो, *पृथ्वी दिवस* सुनहरा […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।