सबका मान नहीं है

0 0
Read Time1 Minute, 5 Second

krishn

जग में सब का मान नहीं है,
हीरों की अब खान नहीं है।।

पहले सा अब  काम नहीं है,
इतनी भी पहचान  नहीं है।।

अपने ही रखते हैं  खंजर,
जीना अब आसान नहीं है।।

खूब मिलावट करते हैं क्यों?
अब अच्छा सामान नहीं है।।

जिसको हमने मान दिया था,
करता वह सम्मान नहीं है ।।

रोज  यहाँ  बीमारी  होती,
पहले सा जल-पान नहीं है।।

जो करता है दगा सभी से,
देखो  वह  इंसान नहीं है।।

भ्रम की इस दुनिया में हमको,
असली की पहचान नहीं है।।

झूठ बोलता हर मानव अब,
सच की रही जबान नहीं हैं ।।

झूठ मिले हर चौराहे पर
सच की कोई दुकान नहीं है।।

कलयुग में भगवान भी बिकते
राम भगत हनुमान नहीं  है।।

कलियुग में लगता  है ऐसा,
राम नहीं, रहमान नहीं  है।।

“राज” देश का किसको सौंपे,
लायक कोई  प्रधान नहीं है।।

#कवि कृष्ण कुमार सैनी “राज”

दौसा,राजस्थान 

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

यह जो नया शहर बसा है यहाँ

Sun Feb 17 , 2019
यह जो नया शहर बसा है यहाँ कहीं कोई गाँव तो उजड़ा होगा ज़मीं बेआबरू होकर बंजर हुई टिड्डों का काफिला गुज़रा होगा शेख साहब महफ़िल में आ बैठे अब दुआओं में भी मुजरा होगा यहाँ हवाएँ बहुत शान्त लगती हैं पास जरूर दर्द का हुजरा* होगा दो लोग बैठे […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।