बदलता वक्त हूँ

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sourabh dikshit
बदलता वक्त हूँ, जाने मेरा अंजाम क्या होगा,
सुनाई दे रहे नामों में मेरा नाम क्या होगा ?
यहां बिकती सभी चीजें हैं जिनका मोल लाखों में,
बना अनमोल फिरता हूँ तो मेरा दाम क्या होगा ?
निकल पड़ता हूँ, नदियों में समंदर भी मिले तो क्या,
अभी जो है ये नजराना मेरा ईनाम क्या होगा ??
लगा रखा है तेरा नाम अपने नाम के संग में,
हुआ रोशन जमाने में, तो अब बदनाम क्या होगा ?
हुई नेमत जो शिव की तो,मिली है रोशनी हमको,
नहीं अब सोचना कुछ भी मेरा परिणाम क्या होगा।
                                                                #सौरभ दीक्षित ‘पिडिट्स’ 
परिचय: सौरभ दीक्षित ‘पिडिट्स’ की जन्मतिथि-१९ जुलाई १९८५ और जन्म स्थान कानपुर है। आपका शहर-कानपुर, बनारस(राज्य-उत्तरप्रदेश) है। शिक्षा-बी. टेक.(सिविल) सहित एमबीए (योजना प्रबंधन) है। अभियांत्रिकी कार्यक्षेत्र अपनाते हुए भी आप गीत,ग़ज़ल,छन्द, मुक्तक,हास्य और व्यंग्य लेखन करते हैं।ब्लॉग पर भी सक्रिय हैं। बतौर प्रकाशन आपकी रचनाएँ कुछ पत्रिकाओं में हैं। आप एक भारतीय होने से बड़ा कोई सम्मान नहीं मानते हैं। पिडिट्स’ संस्था से जुड़कर समाजसेवा भी करते हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-समाज में एकता-अखंडता का संदेश देना,साथ ही आज के दौर में लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाना तथा समाज की बुराईयों को उजागर करना है।

matruadmin

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29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।