देना है दातार तो ….

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babulal sharma
देना  हो  दातार  तो, दे  शबरी   सी   प्रीत।
पवन तनय सी भक्ति दे,कर्ण सरीखा मीत।।
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भ्राता देना लखन सा,यसुदा जैसी मात।
राम सरीखा पुत्र हो, दशरथ जैसा तात।।
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राधा जैसी प्रिया हो,कर्ण सरीखा मीत।
भाग्य सुदामा से भले,तानसेन से गीत।।
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अक्खड़ पना कबीर सा,रस जैसे रसखान।
अर्जुन  जैसी   नींद  दे,  गीता  जैसा  ज्ञान।।
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रिश्ते साथी कृष्ण से, बर्बरीक  से बान।
तुलसी सा वैराग्य दे, सूरदास  सा मान।।
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कूटनीति चाणक्य सी,विदुर  सरीखी नीति।
चन्द्र गुप्त सा बल मिले, मीरा जैसी  प्रीति।।
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रावण जैसा ज्ञान दे ,हठ हम्मीर  समान।
राणा जैसी आन दे, चेतक  जैसा  मान।।
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पन्ना  जैसा त्याग दे, चंदन  सा  बलिदान।
पृथ्वी राज चौहान सा,देना तुम अभिमान।।
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वीर शिवा  सी  वीरता ,सांगा  जितने  घाव।
भूषण सी कविता लिखा,सतसैया से भाव।।
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देना हो  सन्यास  तो, बना विवेकानंद।
दयानंद  सा धीर दे, परमहंस  आनंद।।
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चतुर बनाए तो प्रभो, ज्यों तेनाली राम।
दशरथ माँझी दे बना,परमारथ के काम।।
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साहस बोस सुभाष सा,दे मुझको दातार।
लाल बाल अरु पाल से,देना मुझे विचार।।
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हरिश्चन्द्र सा सत्य दे, बाली सा  वरदान।
पतंजली  सा योग दे, भामाशाही  दान।।
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भगत सिंह सी मौत दे, शेखर  सी  पिस्तोल।
ऋषि दधीचि सी देह दे,गुरु नानक  से बोल।।
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कफन तिरंगा रंग दे,जनगणमन का गान।
वतन शहीदी शान दे, बलिदानी  अरमान।।
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मातृभूमि की गोद मे ,हिन्दी हिन्दुस्तान।
भारत  मेरा  देश  हो, जन्मूँ  राजस्थान।।

नाम– बाबू लाल शर्मा 
साहित्यिक उपनाम- बौहरा
जन्म स्थान – सिकन्दरा, दौसा(राज.)
वर्तमान पता- सिकन्दरा, दौसा (राज.)
राज्य- राजस्थान
शिक्षा-M.A, B.ED.
कार्यक्षेत्र- व.अध्यापक,राजकीय सेवा
सामाजिक क्षेत्र- बेटी बचाओ ..बेटी पढाओ अभियान,सामाजिक सुधार
लेखन विधा -कविता, कहानी,उपन्यास,दोहे
सम्मान-शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र मे पुरस्कृत
अन्य उपलब्धियाँ- स्वैच्छिक.. बेटी बचाओ.. बेटी पढाओ अभियान
लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।