कौआ की काँव-काँव 

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mukesh rishi varma
कौआ काला-काला |
खोल लिया इसने अक्ल का ताला ||

    काँव-काँव का राग सुनाता |
पर कभी न धोखा खाता ||

       कौआ काला-काला |
इसका बड़ा बोलबाला ||

छत की मुंडेर पर काँव-काँव बोले |
चुन्नू-मुन्नू के मन में मिश्री घोले ||

       प्यारे-प्यारे मामा आयेंगे |
चना-रेबडीं लायेंगे ||

खुश हो मुन्नू ने रोटी छत पर उछाली |
कौए न झट उठा कर खाली ||

    शाम हो गई पर मामा नहीं आये |
चुन्नू-मुन्नू ने मुंह फुलाये ||

               मम्मी ने समझाया –
तुमको काँव-काँव का मतलब समझ न आया ||

     कौआ भूख से काँव-काँव चिल्लाया |
नहीं कोई मामा के आने का संदेशा लाया ?

#मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

परिचय : मुकेश कुमार ऋषि वर्मा का जन्म-५ अगस्त १९९३ को हुआ हैl आपकी शिक्षा-एम.ए. हैl आपका निवास उत्तर प्रदेश के गाँव रिहावली (डाक तारौली गुर्जर-फतेहाबाद)में हैl प्रकाशन में `आजादी को खोना ना` और `संघर्ष पथ`(काव्य संग्रह) हैंl लेखन,अभिनय, पत्रकारिता तथा चित्रकारी में आपकी बहुत रूचि हैl आप सदस्य और पदाधिकारी के रूप में मीडिया सहित कई महासंघ और दल तथा साहित्य की स्थानीय अकादमी से भी जुड़े हुए हैं तो मुंबई में फिल्मस एण्ड टेलीविजन संस्थान में साझेदार भी हैंl ऐसे ही ऋषि वैदिक साहित्य पुस्तकालय का संचालन भी करते हैंl आपकी आजीविका का साधन कृषि और अन्य हैl

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Wed Jan 16 , 2019
आल्हा छन्द* (हिन्दी भाषा पर) हम सबका अभिमान यही है , इससे सबकी है पहचान। सबसे प्यारी हिंदी भाषा, इसमें बसी हमारी जान।। मान बढ़ाती हम सबका यह, फिर भी इससे हम अनजान। सहज, सरल, मनभावन है ये, हिन्दुस्तां की ऊँची शान।। #कृष्ण कुमार सैनी”राज” दौसा,राजस्थान  Post Views: 30

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।