श्री राम जन्म भूमि मुद्दे पर विहिप कार्याध्यक्ष एडवोकेट श्री आलोक कुमार का प्रेस वक्तव्य :

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नई दिल्ली |

माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा श्रीराम जन्मभूमि मामले में अपील की सुनवाई सम्बन्धित पीठ द्वारा आगामी 10 जनवरी को सुने जाने के लिए टाल दी गई है. अच्छा होता कि सम्बंधित पीठ का गठन सुनवाई की पिछली तारीख, यानि 29 अक्टूबर, से पहले ही कर दिया जाता.

देखना यह है कि नई पीठ मामले पर क्या रुख अपनाती है, विशेषकर दिन-प्रतिदिन सुनवाई तथा अपीलों के शीघ्रातिशीघ्र निस्तारण के विषय में किए गए आग्रह के सम्बन्ध में.   

हमारा यह स्पष्ट मत है कि संसदीय कानून के द्वारा इस मामले का शीघ्रातिशीघ्र निस्तारण हो सकेगा तथा हमारी केंद्र सरकार से मांग है कि वह अपने इसी कार्यकाल में यह कानून बनाए.  

 

एडवोकेट आलोक कुमार

कार्याध्यक्ष

विश्व हिन्दू परिषद्

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।