प्रार्थना-पत्र 18

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सेवा में,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी,
दिनांक: 29 फरवरी 2020
विषय: नागरिकता संशोधन कानून सीएए के पक्ष में पदयात्रा हेतु अनुमति।

आदरणीय महोदय
जय हिंद!
आदरणीय माननीय सम्माननीय प्रधानमंत्री दामोदर भाई नरेंद्र मोदी जी बीते कल मैंने रेडियो स्टेशन जम्मू में अपनी ग़ज़लों की रिकार्डिग करवाई।जिसे सी.एल. शर्मा जी ने सेंसर किया।चूंकि मेरे विभाग सशस्त्र सीमा बल अर्थात एसएसबी ने मुझे पागल की संज्ञा दी हुई है।जबकि जम्मू के मनोचिकित्सालय के मनोविशेषज्ञों से लेकर एम्स अर्थात अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के मनोविशेषज्ञों द्वारा मुझे मानसिक स्वस्थ घोषित किया हुआ है।
उसके बाद रीजनल रेडक्रास सोसायटी के नव नियुक्त माननीय सचिव विनोद मल्होत्रा जी से मिला था।जहां उन्हें शुभकामनाएं देते हुए 13 अक्तूबर 1997 के अपने 85 प्रमाणपत्रों की मांग की थी।उसके बाद रेडक्रास का जीवन सदस्य बनने के लिए फार्म लेकर जे.एंड के. अकैडमी ऑफ आर्ट कल्चर एंड लैंग्वेजिज़ जम्मू चला आया था।
उसके बाद वहां से एसएसपी सीआईडी जम्मू कार्यालय आ गया था।जहां एसएसपी महोदय जी से भेंट की और उन्होंने अतिरिक्त एसएसपी महोदय जी से मिलने के लिए भेज दिया।जो साथ वाले कमरे में थे।माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी वह भी मधुर स्वभाव के थे।उन्होंने मुझे सादर बिठाया और अपने पी.ए.जी को बुलाया।जिन्होंने बताया कि इनकी पदयात्रा के लिए उपायुक्त से पत्र आया हुआ है।जिस पर अभी कार्रवाई चल रही है।तब उन्होंने मुझे पूछा कि क्या सेवानिवृत हो? मेरे हां कहने पर उन्होंने आगे पूछा कि सेवानिवृत कब और कैसे हुए?तब मैंने विवशता से स्पष्ट बताया कि मेरे विभाग एसएसबी ने मुझे पागल करार कर नौकरी से निकाल दिया था और बाद में मुझे पागल की पेंशन दी थी।तब उन्होंने हैरत से कहा कि कोई भी अधिकारी तब तक नौकरी से नहीं निकाल सकता।जब तक डाक्टर लिखित में पागल घोषित न करें।इसलिए आपको कोर्ट में जाना चाहिए था।मैंने बताया कि मुझे न्यायालय में भी न्याय नहीं मिला।इसलिए न्याय की खोज़ में हूँ।उनके प्रश्नों के उत्तर में मैंने बताया कि लेखक हूँ और लेखन कार्य में व्यस्त हूँ।मैंने उन्हें अपनी पुस्तकें भी दिखाईं।उसके बाद उन्होंने मुझे खौड़ जम्मू से आपके कार्यालय दिल्ली तक पदयात्रा की चल रही जांच में तेजी लाने का अश्वासन दिया।जिसके बाद मैं अपने घर ज्यौड़ियां आ गया।
प्रधानमंत्री जी यह पहली बार थी।जब मुझे पागल शब्द पर चर्चा करते हुए इतना दुख नहीं हुआ।जितना अक्सर होता है।क्योंकि इस बार मुझे आशा है कि केवल पागल पर ही नहीं बल्कि देशद्रोह के शब्द पर भी सीआईडी विभाग के उच्च स्तरीय अधिकारी मंथन कर रहे हैं।
माननीय प्रधानमंत्री जी ‘पागल और देशद्रोह’ ऐसे कलंकित शब्द हैं।जिनके कारण मेरा व मेरे पूरे परिवार का जीवन कलंकित हो चुका है।इसीलिए मेरा घर-परिवार टूट कर बिखर चुका है।
यही नहीं इन्हीं दो कलंकित शब्दों के कारण सभ्य समाज में मेरा मान- स्वाभिमान एवं प्रतिष्ठा समाप्त हो चुकी है।जिसे पुन: प्राप्त करना मेरा संवैधानिक अधिकार एवं कर्त्तव्य भी है।जिसे पाने के लिए दिन-रात पुस्तकें लिख कर स्वयं प्रकाशित भी कर रहा हूँ।
माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी जब यह समाज आपकी एवं सशक्त गृहमंत्री अमित शाह जी द्वारा बार-बार नागरिकता संशोधन अधिनियम पर प्रकाश डालने के बावजूद नागरिकता छीनने का भ्रम फैलाया जा रहा है।तो मेरी क्या औकात है कि एम्स द्वारा स्वस्थ घोषित करने के बावजूद एसएसबी विभाग और समाज मुझे स्वस्थ मान ले।विशेष रूप से तब, जब सरकार मुझे हर महीने पागल की पेंशन दे रही हो।
इसलिए माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी एवं सशक्त गृहमंत्री अमित शाह जी सीएए के पक्ष में पदयात्रा की शीध्र अति शीध्र अनुमति देकर कृतार्थ करें।सम्माननीयों जय हिंद

प्रतिलिपि सेवा में:- (1) माननीय सांसद डा.जितेंद्र सिंह जी, शमशेर सिंह मन्हास जी एवं जुगल शर्मा सहित
(2) माननीय उपराज्यपाल जम्मू कश्मीर,डिव काम जम्मू, डीसी जम्मू और एसडीएम अखनूर व एसडीएम खौड़ एवं कई अन्यों को सूचना एवं शीघ्र उचित कार्यवाही हेतु अणुडाक अर्थात इमेल द्वारा सादर भेज दी हैं।सम्माननीयों जय हिंद

प्रार्थी
इन्दु भूषण बाली
आरएसएस के स्वयंसेवक, पत्रकार, चिंतक, आलोचक, हिंदी+अंगरेज़ी+डोगरी लेखक, विचारक, शोधकर्ता एवं भारत के राष्ट्रपति पद का पूर्व प्रत्याशी समीप महावीर मंदिर खौड़ कैंप,
डाकघर व तहसील:- खौड़
जिला:- जम्मू
प्रदेश जम्मू व कश्मीर

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आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।