महाकाली (माता का सातवाँ रूप ) 

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चराचर विश्व की अधीश्वरी, जगत् को धारण करनेवाली, संसार का पालन और संहार करने वाली तथा तेज:स्वरूप भगवान विष्णु की अनुपम शक्ति पराम्बा का सातवाँ रूप  ‘कालरात्रि’ या ‘महाकाली’ का है ।
 कालरात्रि का शाब्दिक अर्थ है –  ‘जो सब को मारने वाले काल की भी रात्रि या विनाशिका हो’ ।  कालरात्रि को रूप  में भयंकरा, साधक के लिए अभयंकारा और भक्तों के लिए शुभंकरी कहा गया है, क्योंकि यह  समस्त शुभों की आश्रयस्थली हैं ।
 मान्यता है इस दिन तक आते-आते साधक की साधना मूलाधार से सहस्रार तक पहुँच जाती है । परमसत्ता इसी चक्र में अवस्थित होती है;  इसीलिए यह आदिम ऊर्जा ही  उद्दाम ऊर्जा या असीम ऊर्जा का स्पंदन कराती है।
सांकेतिक  रूप से इसे माँ के  उग्र स्वरूप में निरूपित किया गया  ताकि इन सप्त चक्रों की सुषुप्त ऊर्जा जब उद्घाटित हो तो इस सृष्टि के कण-कण में अपरिमित ऊर्जा का प्रवाह हो ।
जगन्मयी माता की महिमा को ग्रंथों में कुछ इन विभूषणों से व्याख्यायित किया गया है :  आरम्भ में सृष्टिरूपा ,  पालन-काल में स्थितिरूपा , कल्पान्त के समय संहाररूपा,  महाविद्या, महामाया, महामेधा, महास्मृति, महामोहरूपा, महादेवी ,महासुरी  और तीनों गुणों को उत्पन्न करनेवाली सबकी प्रकृति ।
इसके अलावा, महामाया को भयंकरा, कालरात्रि, महारात्रि और मोहरात्रि भी कहा गया तो  श्री,  ईश्वरी,  ह्री और  बोधस्वरूपा बुद्धि भी कहा गया ।
शक्ति की देवी कालिका (जो शस्त्र के रूप खड्ग धारण करती हैं ) की साधना हेतु मंत्र :
ॐ क्रीं कालिकायै नमः ।
ॐ कपालिन्यै नमः ।।
#कमलेश कमल

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।