कहाँ गए भगवान्

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rinkal sharma
कहाँ गए भगवान्
सुना है बड़े बुज़ुर्गों से
कण कण में बसते हैं भगवान
पर न जाने मंन क्यों सोच रहा कि
कलयुग में कहाँ गए भगवान
जब सुनती थी दादी और नानी
कोई किस्सा या कोई कहानी
हर किस्से में था यही बखान
कण कण में बसते है भगवान
कहती थी दादी महाभारत में
जब द्रोपदी, भरी सभा लजाई थी
तब स्वयं कृष्ण भगवान ने आकर
द्रोपदी की लाज़ बचाई थी
पर आज न जाने कितनी ही
द्रोपदी लजाई जाती है
न जाने कितनी ही मासूम “निर्भया”
सरेआम लुटाई जाती है
न जाने कितनी मासूमों ने मारे शर्म के दिए अपने प्राण
हर पल अब मंन ये सोच रहा कि
कलयुग में कहाँ गए भगवान
अब क्यों नहीं आते प्रभु कृष्ण बनके
नारी की लाज़ बचाने को
अब क्यों नहीं लेते रूप नरसिंघ का
निर्बल , मासूमों को बचाने को
क्यों सुध नहीं लेते अपने बच्चों की
कहाँ छुप गए हो हे कृपानिधान
हर पल मन ये ही पूछता है की
आखिर कलयुग में कहाँ गए भगवान…
#रिंकल शर्मा
परिचय-
नाम – रिंकल शर्मा
(लेखिका, निर्देशक, अभिनेत्री एवं समाज सेविका)
निवास – कौशाम्बी ग़ाज़ियाबाद(उत्तरप्रदेश)
शिक्षा – दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक , एम ए (हिंदी) एवं फ्रेंच भाषा में डिप्लोमा 
अनुभव –  2003 से 2007 तक जनसंपर्क अधिकारी ( bpl & maruti)
2010 – 2013 तक स्वयं का स्कूल प्रबंधन(Kidzee )
2013 से रंगमंच की दुनिया से जुड़ी । बहुत से हिंदी नाटकों में अभिनय, लेखन एवं मंचन किया । प्रसार भारती में प्रेमचंद के नाटकों की प्रस्तुति , दूरदर्शन के नाट्योत्सव में प्रस्तुति , यूट्यूब चैनल के लिए बाल कथाओ, लघु कथाओंं एवं कविताओं का लेखन ।  साथ ही 2014 से स्वयंसेवा संस्थान के साथ समाज सेविका  के रूप में कार्यरत।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।