जैसे किसी गन्ने को चरखी में से चार बार गुजारने के बाद उसकी हालत होती है, या किसी भी पतरे की अलमारी को गोदरेज की अलमारी कहने की तर्ज पर पानी की हर बोतल को बिसलरी कहने वाले किसी व्यक्ति द्वारा पूरी बोतल गटकने के बाद उसे मरोड़ मरोड़ कर […]

एक कहावत है – “ख़त का मजमून भाँप लेते हैं लिफाफा देखकर।” हैं साहब ऐसे लोग, जो ऐसा कर सकते हैं, लेकिन बहुत कम। हो सकता है आने वाले समय में यह कहावत अप्रासंगिक हो जाए और लिफाफा देखकर मजमून भाँपने वाले कोई न बचे…क्योंकि वर्तमान पीढ़ी न तो कागजों […]

इक छोटा सा वायरस,दहशत में संसार। कोरोना ने रोक दी,जीवन की रफ्तार।। साफ-सफाई स्वच्छता,साबुन का उपयोग। कोरोना की श्रृंखला,तोड़ेंगे हम लोग।। धर्म,जाति,मज़हब नहीं,ऊँच,नीच ना रंग। कोरोना का वायरस,करे सभी को तंग।। क्यों दें हम परिवार को,जीवन भर की टीस। दृढ़ता पूर्वक काट लें,घर में दिन इक्कीस।। रखें दूरियाँ जिस्म से,दिल […]

सोफे पर अधलेटा होकर सोहनलाल द्विवेदी जी की यह पंक्तियां गुनगुना रहा था- आया वसंत आया वसंत छाई जग में शोभा अनंत सरसों खेतों में उठी फूल बौरें आमों में उठी झूल बेलों में फूले नये फूले पल में पतझड़ का हुआ अंत आया वसंत आया वसंत। मेरी यह गुनगुनाहट […]

क्या ज़्यादा कीचड़ उछलने के कारण ही ज़्यादा खिला कमल? दरअसल बीजेपी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन द्वारा सत्ता में पुनर्वापसी के कारणों को राजनीतिक पंडित अलग-अलग तरह से समझने की कोशिश कर रहे हैं। जहाँ कुछ  इसका कारण मोदी लहर को मानते हैं, वहीं ऐसे भी कम नहीं हैं, जो […]

वैश्वीकरण के इस दौर में सांस्कृतिक अन्तःक्रिया और समंजन की प्रकिया में एक त्वरा परिलक्षित हो रही है। संस्कृति के महत्तम-अवयव के रूप में साहित्य भी इससे असंपृक्त नहीं है। इस संदर्भ में दृष्टव्य है कि भारतीय-भाषाओँ में जहाँ पहले सिर्फ अंग्रेजी-काव्य का व्यापक प्रभाव था, वहीं आज जापानी-काव्य-विधाओं ने […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।