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अपनी कृपा की कोर दो वरदान दो वरदान दो |
वागीश वीणा वादिनी करुणा करो करुणा करो |
मुझको अगम स्वर ज्ञान का वरदान दो वरदान दो |
निष्काम हो हर कामना मैं नित करूँ आराधना |
मन का कलुष तम दूर हो वरदान दो वरदान दो |
नव गीत नव लय ताल दो शुचि शब्द का भंडार दो |
शुभ  कल्पना  साकार  हो  वरदान  दो  वरदान दो |
हो विमल मति हो सरल गति शालीनता उर में बसे |
बृम्हासुता   ज्योतिर्मया   वरदान   दो   वरदान   दो |
हे धवल वसना  भगवती विद्या की देवी वंदिता |
हिमराशि सी मुक्ता लड़ी सुर पूजिता आनंदिता |
सम्पूर्ण  जड़ता  दूर  हो  वरदान  दो  वरदान दो |
अपनी कृपा – – – – – – – – – – – – – –  – –
हे हंसवाहिनी – – – – – – – – – – – – – – – –

#नाम : मंजूषा श्रीवास्तव 

साहित्यिक उपनाम : “मृदुल”

शिक्षा : एम. ए.   बी . एड
कार्य क्षेत्र : लेखन
विधा : कविता ,मुक्तक ,दोहा ,हाइकू ,गद्य में लेख ,लघु कथा ,संस्मरण आदि 
प्रकाशन : कई साझा संकलन ,विविध पत्र – पत्रिकाओं में 
सम्मान :  मुक्तक शिरोमणि ,आगमन साहित्य गौरव 2018, रंगोली मातृत्व ममता सम्मान 2017, काव्यसुधा सम्मान , रंगोली साहित्य भूषण सम्मान 2018 आदि
अन्य उपलब्धि : समय समय पर दूरदर्शन एवं आकाशवाणी के साहित्यिक कार्यक्रमो में सहभागिता 
वर्तमान पता : म. न.  05, महावीर रेज़ीडेंसी निकट तुलसी कार केयर मांस विहार ,इंदिरा नगर 
शहर : लखनऊ 
प्रदेश : उत्तर प्रदेश 
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