तरुणसागर चालीसा के अंश

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dashrath
  विनम्र श्रद्धांजलि
जयजयजयजय तरुणासागर।
सच्चाई  को किया उजागर। ।
ऋषभदेव से तुम अवतारी।
महावीर से सत्य विचारी।।
प्रताप शांति के घर जाये।
पवन जैन जब नाम धराये।।
चौदह बरस उमर थी भाई।
छोड़ खिलोना मुनिपद पाई।।
गढ छत्तीसा शिक्षा पाये।
क्रांतिकारी मुनि संत कहाये।।
सन अट्ठासी बीस जुलाई।
बागी डोरा  दीक्षा  पाई।।
पुष्पदंत मुनि दीक्षा दीनी।
मृत्यु बोध कथा जब चीह्नी।।
छुल्लकएलक अरुमुनि दीक्षा।
कठिन तपस्या घर घर भिक्षा।।
दीनबन्धु  करुणा के सागर।
ज्ञान धरम के तुम ही आगर।।
सत्य अहिंसा दिगम्बर  धारक।
सादा जीवन  उच्च विचारक।।
कड़वे वचन सभी को भाते।
दर्शन करने सब जन धाते।।
राष्ट्र संत के तुम अधिकारी।
संयम नियमा धरम पुजारी।।
युग दृष्टा अरु सांची वाणी।
जीवन निर्मल जैसा पानी।।
एक सितंबर सन् अट्ठारा।
देवलोक गमन भया तारा।।
यह चालीसा  जो कोई गावे।
सत्य मार्ग को तुरतहि पावे।।
  डॉ दशरथ मसानिया 
आगर मालवा (म प्र)
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।