कौन होगा इस बार

0 0
Read Time1 Minute, 6 Second

pramod kumar

रेशम की डोर में बांध रही  उमीदों का संसार

इस धागे में छिपा है भाई बहन का प्यार

पर करती हूँ सहमा  सा महसूस खुद को  समाज में

  पर इंद्राणी की रक्षा करने वाला , कौन होगा  विष्णु इस बार

मै भी रहना चाहती हूँ  सम्मान से

पर डरती भी हूँ अपने अपमान से

घूरती नजरों से गुजरना  पड़ता है रोज मुझको

द्रोपदी की लाज  को बचाने वाला  कौन होगा कृष्ण इस बार

मै भी चलना चाहती हूँ ज़माने की चाल से

रूह काँप उठती मेरी दुनिया के हाल  से

पंख फ़ैला छूना चाहती हूँ  आकाश को

यमुना को बहने आजादी देने वाला कौन होगा यम इस  बार

नहीं मांगती धन, दौलत, महल ,अटारी “हर्ष” आज में तुम से

शांता को जो  अपनाये  कौन होगा रघुनंदन इस  बार,

प्रमोद कुमार “हर्ष”

सरकाघाट मंडी  हिमाचल प्रदेश

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

अब रामद्रोही भी लौटने लगे हैं श्रीराम मंदिर की ओर !!

Sat Aug 25 , 2018
अयोध्या में भगवान श्री राम की जन्म भूमि पर भव्य मंदिर बने, इस बात को अब सभी कहने लगे हैं. चाहे कोई राजनेता हो या समाज शास्त्री, हिन्दू हो या मुसलमान. वह अलग बात है कि कुछ लोग यह डंके की चोट पर कहते हैं तो कुछ दबी जुबान में, […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।