शिक्षक बिहार

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noushad varasi
जिसे न पढ़ना आता है,
न पढ़ाना आता है,
वही शिक्षक बिहार का कहलाता है
होता है समय विद्यालय के खुलने का
वो घर पर सोया पाया जाता है
सरकारी नियमों को ताक में रख
मनमानी करने लगता है
बिना अवकाश स्वीकृति के
घर में पाया जाता है
यहाँ सब मैनेज हो जाता है
निरीक्षणकर्ता सरकारी अफसर हरे नोट में बिक जाता है
पोषाहार के कारण विद्यालय में विद्यार्थियों का मन बहल जाता है
समय असमय घंटी बजती है
टीचर की तब नींद लगती है
दक्षता परीक्षा में जब बार बार फेल हो जाता है
सच मानो यारों दिल ही टूट जाता है
मूल्यांकन में रिजल्ट जब बेकार आता है
सच है शर्म से तब सर झुक जाता है
असफल होने पर भी सरकार की महिमा से
शिक्षक बनना आसान होता है।
# नौशाद वारसी
समस्तीपुर , बिहार
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।