मन मेरा दीपक-सा

0 0
Read Time3 Minute, 36 Second

satish tiwari

प्रखर प्यास अंतर में भरकर गुज़र रहा जीवन,
हाथ गहा न किसी ने हँसकर गुज़र रहा जीवन!

प्यासे लोचन प्यासी धड़कन प्यासी उर की चाह,
बना प्यास का उद्गम अंतर गुज़र रहा जीवन!

मिली नहीं सौन्दर्य कुमारी मुझको सपने में,
केवल रूप-पुजारी बनकर गुज़र रहा जीवन!

प्यारा यौवन अब ढलान पर माँगे अपनापन,
प्रेम दिखाए कोई तो हम पर गुज़र रहा जीवन!

मन मेरा दीपक-सा चहुँदिशि करे उजाला पर,
‘सरस’ जले जैसे तिल-तिल कर गुज़र रहा जीवन!

जीवनवृत

*सतीश तिवारी ‘सरस’

पिता -स्व. श्री सत्यनारायण तिवारी 
जन्मतिथि -26 जनवरी
जन्म स्थान -ग्राम-मोहद,तहसील-करेली,जिला-नरसिंहपुर (म.प्र.)

शिक्षा-एम.ए (समाजशास्त्र,हिन्दी साहित्य),बी.एड्.,बी.सी.जे.,पी.जी.डी.सी.ए.

सम्प्रति-हिन्दी अतिथि शिक्षक (वर्ग-1)
अध्यक्ष,साहित्य सेवा समिति,जिला-नरसिंहपुर/जिलाध्यक्ष,राष्ट्रीय हिन्दी सेवा समिति

प्रकाशित कृतियाँ-(1)हाशिये पर ज़िन्दगी (ग़ज़ल संग्रह),(2)ख़त लिखे जो प्यार के (ग़ज़ल संग्रह)(3)जाने कौन..?(ग़ज़ल संग्रह),(4)नाते निभते नेह से (दोहा-कुण्डलिया संग्रह)

प्रकाशन की राह में- 1.प्रेम पिपासा (गीत संग्रह)
2.सपना (लघुकहानी संग्रह),3.क्योंकि मैं नहीं चाहता (कविता संग्रह),4.तुलसी-सरसांजलि (कुण्डलिया संग्रह)
5.कबीर-सरसांजलि (कुण्डलिया संग्रह)

प्रसारण-आकाशवाणी जबलपुर से रचनायें प्रसारित

सम्पादन-‘अक्षर साधक’ (नरसिंहपुर जिले के91 कवियों का संयुक्त काव्य संग्रह),’प्रवाह'(उभरते सात कवियों का काव्य संग्रह),’प्रेरणा’मासिक (लघु पत्रिका),’प्रवाह’-2′ (9 कवियों का काव्य संग्रह),’भाव-सम्पदा'(‘काव्य अंज़ुमन’ व्हाट्सऐप संदेश पटल का आयोजन,काव्य संग्रह),’काव्य सुधा’ (संयुक्त काव्य संग्रह)

सम्मान-विविध संस्थाओं द्वारा सम्मानित

विशेष-1.वर्ष 1999 में दिल्ली में आयोजित 15 वें दलित साहित्यकार सम्मेलन में दिये जाने वाले डॉ.अम्बेडकर फेलोसिफ़ सम्मान हेतु बुलाया गया था किन्तु किसी कारणवश न पहुँच सके।
2.मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित प्रतिभा खोज प्रतियोगिता के अंतर्गत साहित्य की कविता विधा में ब्लाक,जिला व संभाग स्तर पर चयनित होने के उपरांत 24 फरवरी 2016 को उज्जैन में रखी गयी राज्योत्सव प्रतिभा खोज-2016 में प्रशंसा पत्र व चेक प्रदान कर सम्मानित किया गया।

सम्पर्क सूत्र-नरसिंहपुर (म.प्र.)

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

मन की व्यथा

Sat Jul 21 , 2018
सुबह सुबह तुम श्रंगार सजा कर, कोमल फूलों को क्यों चुनती हो। शुर्ख गुलाबी साड़ी में तुम युवती, फूलों से ज्यादा कोमल लगती हो। सँभल सँभल कर तुम चुनना , इन नन्हे नन्हे कोमल फूलों को। पौधा भी जलता तुमसे सोना, ध्यान तुम्हें है रखना आहत न हो। एक बात […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।