पाकिस्तान अब कठघरे में

Read Time0Seconds
vaidik-1-300x208
पाकिस्तान अब एक नई मुसीबत में फंस गया है। फरवरी में सउदी अरब, तुर्की और चीन ने पाकिस्तान को बचा लिया था लेकिन अब इन तीनों राष्ट्रों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। अब पेरिस स्थित अंतरराष्ट्रीय संगठन (एफएटीएफ), जिसका काम आतंकवादियों के पैसे के स्त्रोतों को सुखा देना है, ने पाकिस्तान को कठघरे में खड़ा कर दिया है। यदि पाकिस्तान अगले सवा साल में अपने सभी आतंकवादी संगठनों की आमदनी पर प्रतिबंध नहीं लगा पाया तो उसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए जाएंगे। उसकी हालत उत्तर कोरिया और ईरान से भी बदतर हो जाएगी। अब पाकिस्तान की गिनती इथियोपिया, सर्बिया, श्रीलंका, सीरिया, ट्रिनिडाड, ट्यूनीशिया और यमन जैसे संकटग्रस्त देशों में होने लगेगी। वह नाम के लिए भी पाकिस्तान याने पवित्र स्थान नहीं रह पाएगा। उसे उद्दंड राष्ट्र (रोग़ स्टेट) की अपमानजनक उपाधि मिल जाएगी। पाकिस्तान के विरुद्ध कार्रवाई करने की पहल अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और भारत ने की है। पिछले तीन महिने में यदि पाकिस्तान अपने आतंकी संगठनों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई कर देता तो सऊदी, तुर्की और चीनी सरकारें उसे अभी बचा लेतीं लेकिन उसका हाल तो यह है कि उसकी कठघराबंदी के कुछ घंटे पहले ही उसने मौलाना लुधयानवी के अहले-सुन्नत नामक आतंकी संगठन पर से प्रतिबंध उठा लिया था। उसने हाफिज सईद को नजरबंद करने का दिखावा जरुर किया लेकिन अब भी वह पूरे पाकिस्तान में खुलेआम में घुमता है। उसने अपना एक नया राजनीतिक दल भी बना लिया है। अहले-सुन्नत का एक कुख्यात नेता संसदीय चुनाव भी लड़ रहा है। पाकिस्तान ने उस अंतरराष्ट्रीय संगठन को जो 26 सूत्री कार्य-योजना दी है, उस पर यदि उसने सितंबर 2019 तक अमल नहीं किया तो पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय अछूत घोषित कर दिया जाएगा। उसे अब आतंकियों की नकदी की तस्करी, अफीम की बिक्री, आतंकियों को मिलनेवाले चंदे, सरकार और फौज से मिलनेवाले पैसों पर प्रतिबंध लगाना होगा। पाकिस्तान के कई विशेषज्ञों का कहना है कि नवाज और शाहबाज शरीफ की सरकार ने ही यह पैंतरा चला है ताकि पाकिस्तान की फौज के कान उमेठे जा सकें। मुझे यह निष्कर्ष बहुत तथ्यात्मक नहीं लगता। इसके अलावा मैं यह भी महसूस करता हूं कि 15 माह का समय बहुत ज्यादा है। सवा साल में भारत और पाकिस्तान की सरकारें बदल जाएंगी। दोनों देशों के चुनाव सिर पर हैं। क्या ही अच्छा होता कि यह संगठन (एफएटीएफ) पाकिस्तान को कुछ हफ्तों में कुठ ठोस कर दिखाने को मजबूर करता।
#डॉ. वेदप्रताप वैदिक
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

 महिमा हिंदी की

Mon Jul 2 , 2018
   मां जैसी ये प्यारी लगती ,    भारत मां के भाल पर सजती ।     भाषाओं की सिरमौर है पर,       अपने सम्मान को है तरसती ।।     सरल सहज आसान है हिंदी ,       एक नया विहान है हिंदी ।     […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।