महिमा हिंदी की

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kaji
   मां जैसी ये प्यारी लगती ,
   भारत मां के भाल पर सजती ।
    भाषाओं की सिरमौर है पर,
      अपने सम्मान को है तरसती ।।
    सरल सहज आसान है हिंदी ,
      एक नया विहान है हिंदी ।
     शब्द नहीं महिमा मंडन के,
        गुणों का बखान है हिंदी ।।
      आंग्ल भाषा का कर उपयोग,
         कितना हम इतराते हैं ।
       देश की भाषा को देश में,
          कितना संघर्ष कराते हैं ।।
    आओ खोया सम्मान दिला दें,
        हिंदी को हिंदुस्तान दिला दें ।
    देश की इस माटी में आओ ,
        हिंदी का परचम लहरा दें ।।

        #डॉ.वासीफ काजी

परिचय : इंदौर में इकबाल कालोनी में निवासरत डॉ. वासीफ पिता स्व.बदरुद्दीन काजी ने हिन्दी में स्नातकोत्तर किया है,साथ ही आपकी हिंदी काव्य एवं कहानी की वर्त्तमान सिनेमा में प्रासंगिकता विषय में शोध कार्य (पी.एच.डी.) पूर्ण किया है | और अँग्रेजी साहित्य में भी एमए किया हुआ है। आप वर्तमान में कालेज में बतौर व्याख्याता कार्यरत हैं। आप स्वतंत्र लेखन के ज़रिए निरंतर सक्रिय हैं।

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