हर कलियों को , फौलादी बनाना होगा

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khushabu kumari

एक कली थी , खिल रही थी ,
हँसती खिलखिलाती , हर फूलों से मिल रही थी ,
कभी सूरज से छुपछुपाती , कभी तितलियों संग इठलाती ,
रहती हमेशा , हँसती गुनगुनाती ।

वक़्त बीतता गया ,
समय बढ़ता गया ,
पर क्या पता था , बीतते वक़्त के साथ , मुस्कुराहट भी बीत जाएगी ,
क्या पता था , बीतते वक़्त में , वो भी खो जाएगी ।

एक दिन की बात हुई , वो वक़्त की रात हुई ,
एक हाथ उसकी ओर बढ़ा ,
वो डरी , सहमी , चिल्लाती रही ,
और वो हाथ , बस उसकी ओर बढ़ता गया , वो चीखती रही ,
कर दिया अलग , उसके पंखुड़ियों को , जो लहराते थे ,
कर दिया अलग उसे , उन पत्तों से , जो कभी वजूद थे उसके ।

सुना था कभी उसने द्रौपदी की कहानी ,
कोई तो होगा , जिसे आती होगी, गोविंद के कर्तव्य को निभानी !
फिर सोचा, मैंने आश भी किससे लगाया,
उस जहां के लोंगो से , जो अपने जहां का ही न हो पाया ,
उस जहां के लोगो से , जहाँ सिर्फ दु:शाशन भरे पड़े है ,
उस जहां के लोगो से , जहाँ गोविंद सिर्फ पन्नो में ही खड़े है ,

खो दिया अपने वजूद को ,
मिट गई उस कली की कहानी ,
जो कभी इठलाया करती थी ,खुद की ही जुबानी ,

फिर हुआ नया सवेरा ,
फिर एक नई कली खिली ,
पर उसकी कहानी भी ,
यूँ ही दु:शाशन तले ढ़ली ,

कब तक ढलेगी ये कलियाँ ?
कब तक होगा, इनका यूँ तिरस्कार ?
अब तो संभालना कलियों को ही है , खुद पर होता ये तिरस्कार ,

न गोविंद कभी आये थे , न गोविंद कभी आएंगे ,
खुद को अब दुःशाषणो से , हम खुद ही बचाएंगे ,
खुद का वजूद , खुद ही संभालना होगा ,
हर कलियों को , अब फौलादी बनाना होगा ।

                                    #खुशबू कुमारी

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।