आजादी के पहले गुलामी एक मुसीबत थी,१५ अगस्त १९४७ के बाद आजादी एक समस्या बन गई,बेबसी कि आज भी हम आजाद देश के गुलाम नागरिक हैं। व्यथा सत्ता बदली है व्यवस्था नहीं, स्वाधीन देश में रोटी-कपड़ा-मकान-सुरक्षा और दवाई-पढ़ाई-कमाई पराधीन होने लगी। यह सब मोहलतें,सोहलतें और जरूरतें कब अधीन होगी। इसी […]

  जैन मुनियों के बारे में बहुत से लोगों को जानकारी न होने के कारण बहुत सारी गलत धारणाएं मन में व्याप्त हैं,जिसके कारण लोग उन्हें सही ढंग से समझ नहीं पाते हैं और भला-बुरा कहते हैं,जबकि हकीकत कुछ और ही होती है। वैसे तो उनके बारे में हम जैसा […]

रक्षा बंधन के पावन पर्व की धूम अभी शांत नहीं हो पाई थी कि, ‘चंडीगढ़ की वर्णिका कुंडू’ का पीछा किन्हीं राजनेता के सुपुत्र द्वारा किए जाने की घटना आज हर तरफ फैली हुई है। ऐसा नहीं है कि-यह कोई पहली घटना है। रोज़ाना ऐसी शर्मसार करती,और बड़े शहरों-महानगरों मे […]

भाई-बहन के पवित्र  प्रेम का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन महिला सुरक्षा का प्रतीक है। मध्य युग में महिलाओं पर अत्याचार बहुत  होते थे,तब अपनी सुरक्षा  के लिए महिलाओं द्वारा भाई की कलाई  पर राखी बांधकर सुरक्षा का वचन ले लिया जाता था। इसका भाई-बहन के सगे होने-न होने से भी कोई […]

फिर आजादी…आजादी का वह डरावना शोर सचमुच हैरान करने वाला था। समझ में नहीं आ रहा था कि,आखिर यह कैसी आजादी की मांग है। अभी कुछ महीने पहले ही तो देश की राजधानी स्थित शिक्षण संस्थान में भी ऐसा ही डरावना शोर उठा था,जिस पर खासा राजनीतिक हंगामा हुआ था। […]

आरक्षण को स्वतंत्र भारत के संविधान में एक समाधान के रूप में शामिल किया गया था,परन्तु आज उसी आरक्षण ने समस्या बनकर पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। अंग्रेजों की गुलामी से आज़ाद हुआ,तब भारतीय समाज जातीय व्यवस्था पर आश्रित थाI दलितों के साथ उचित न्याय हो सके,उन्हें भी समाज […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।