Archives for काव्यभाषा - Page 107

काव्यभाषा

मुझे प्यार है..

मुझे प्यार है, खेत से खलिहान से, मेहनती किसान से जो खेतों से उगाकर, देता है अनाज को। मुझे प्यार है, धरती से, धरती.. की शान से जो हर मौसम…
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‘ऋतु-बसंत’

रंगों में रंगने मौसम के सजने, इजहारे ईश्क… ऋतु बसंत आई है..। लम्हों को जीने लहरों के बहने, इंतजारे आशिक… सुहानी बसंत आई है..। चाहतों में संवरने साँसों को महकाने,…
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जिंदगी सस्ती हो गई..

नेताओं की जिंदगी, जबसे मस्त हो गई , चीजें बहुत महंगी, जिंदगी सस्ती हो गई। कहता था जो मसीहा,लाएगा अच्छे दिन, विदेश यात्रा पूरी उसकी एक साल हो गई। खुलेआम…
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काव्यभाषा

रब का बन्दा…

रब का बन्दा रोए काहे, तू है रब का बन्दा.. काहे बाँधे वो धागे,जो बन जाए फन्दा। कोशिश तो कर खुलेगा, इन हवाओं से लिपटकर तू भी बहेगा महसूस होगा…
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काव्यभाषा

ममतामयी माँ….

माँ को तड़पता सिसकता कराहता देख मन विचलित हो जाता है, आँखों में आंसू नहीं मन तड़प जाता है। मां की जिन्दगी के अंतिम पड़ाव का ये हाल देखा नहीं…
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