Author Archives: matruadmin - Page 1011

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सांपों की कहानी

लचकती छरहरी काया इसकी, जल-थल-नभ वास है निज अँग भरा विष अपने, यह प्रमुख हथियार है l लिपट गले यह शंकर, करता विकट श्रृंगार है उठा रखा धरती सिर अपने,…
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जन-जन को बोध कराता

यदि दुख में दिखता कोई भी, उसके दुःख से भर जाता। देख दूसरे की सुख-सुविधा, अनायास ही सुख पाता। देख सका कवि कहो भला कब, किसी व्यक्ति की भी पीड़ा।…
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खुदगर्ज

  ये कैफ़ तेरा कैसा मुझपर भारी है, या फिर तेरे ही इश़्क की खुमारी है l एक भी मुक्कमल हुआ अपना सपना, पूछो नींद से फिर क्यूं उससे की…
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हे सावन तुम अब मत आना

हे ! सावन तुम अब मत आना तुम्हारे नाम से ही हृदय मयूर नृत्य करने लगता है, तरह-तरह की भावनाएं हिलोरें लेने लगती हैं चहुँ ओर हरा-भरा हो जाता है।…
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खुले पन्ने क्यों पढ़ती नहीं…

नजरों से नजर जब मिली थी कभी, नाम प्राण पृष्ठ पर तभी लिख गई। सोचा कई दफा जाकर कह दूँ आज अभी, कर गया दिल लड़कपन कुछ कहा ही नहीं।…
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हे भारतीय राजनीति के कलंकों…

हे भारतीय राजनीति के कलंकों, अब तो देश को बख्श दो, आज़ादी से आज तक देश को छला, अब तो कुछ उत्थान हो जाने दो। अपनीकुर्सी न जाए तुम चलते…
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