जग में सब का मान नहीं है, हीरों की अब खान नहीं है।। पहले सा अब काम नहीं है, इतनी भी पहचान नहीं है।। अपने ही रखते हैं खंजर, जीना अब आसान नहीं है।। खूब मिलावट करते हैं क्यों? अब अच्छा सामान नहीं है।। जिसको हमने मान दिया था, करता […]
इंदौर। हिन्दी कविता के महानायक एवं सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय” के कालजयी ‘चौथा सप्तक’ में शामिल अग्र कवि राजकुमार कुम्भज जी का जन्मदिवस मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा मनाया गया। कुम्भज जी हिन्दी कविता के वर्तमान दौर के महानायक है, त्रयी और कई संकलनों के हिस्सेदार है, जिन्होंने अब तक कविता […]
