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  अपने पापा के साथ आज रुही जाने वाली थी,अपनी नानी के घर। गुलाबी फ्रॉक पहने हुए बेहद खूबसूरत लग रही थी रुही। पापा ने स्कूटर पर बिठाया, किक लगाई और लेकर चल दिए रूही को उसकी नानी के घर। रुही को दादी ने तैयार किया था,पर दादी कुछ उदास […]

कहें क्या बात हम अपनी, हमारी बात ही क्या है। जमाने के सताए हैं, जमाने की कहें क्या हम? बात ही बात में जज्बातों की कुछ बात  कहते हैं, जमाना है किसी का न। सभी स्वार्थ के हैं साथी, बेबात कोई भी न मिला। दोस्त तो न मिला कोई, दुश्मन […]

मैं अपनी क्या औकात बताऊँ, जेब को कर दी ढीली मैं क्या अपनी पहचान बताऊँ, छौंका लगाकर जला दिया मेरे गोल-मटोल अंगों को, एक ही झटके में रुला दियाl मैं क्या अपनी पहचान बताऊँ, लाल चुनर पहन कर बैठी ठाठ जमाकर बाजार में, है हिम्मत तो छूकर देखो कर दूंगी […]

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महंगी पड़ गई तुम्हारी मोहब्बत हमें, कुछ लिया भी नहीं और सब कुछ दे दियाl वैसे इतना भी बुरा नहीं था ये सौदा, हमको भी तो मिला रातभर आँख खुली रखने का काम आँख मींच के भी न सोने का काम, बिना तुम्हारी इजाज़त के तुम्हें याद करने का काम […]

रात के ११ बज चुके थे और सौम्या ने ऑफिस से निकलकर देखा तो घने अंधेरों ने अपनी हुकूमत बना ली थी। सौम्या के मन में डर पैदा हो रहा था और इस डर का कारण था उसके घर तक पहुंचने में पड़ने वाली एक सुनसान सड़क…। ‘डर’  का कारण […]

धीरे-धीरे बीन बजा रे,देश हमारा सोया है। खा-पीकर कुछ मस्त पड़े हैं,काट रहे जो बोया है॥ कुछ आम को चूस रहे हैं,कुछ के हाथ बबूल लगा। जो जितने हैं भ्रष्ट सयाने,उनका उतना भाग्य जगा॥ सत्यमेव जयते भ्रम है ये,लट्ठमेव जयते से हारा। जो जितना ऊपर से उजला,अंदर से उतना ही […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।