दोस्तों, हमेशा दिलीप साहब के अभिनय की गहराई और ऊँचाईयों की जो परवाज़ रही है,उसको छूना हर भारतीय फिल्म कलाकार का आज भी सपना है,क्योंकि उनका आकलन आज भी बहुत कठिन है। फिर भी उन पर कुछ लिखने की गुस्ताखी कर रहा हूँ। 11 दिसम्बर 1922 को पेशावर में मुहम्मद […]

इस भीषण तपती गरमी में एक अद्भुत शीतल कल्पना हो चली,खुली आँखों ने एक प्यारा स्वप्न दिखाया,और मैं शरद ऋतु की प्रभात बेला में तुम्हारे संग सैर पर निकल चली। हाथों में डाले हाथ लहराते हुए सुबह की हल्की गुलाबी ठंड…।एक ‘हरश्रृगांर के पेड़’ पर बरबस दृष्टि चली गई…। हरी […]

पानी में कागज की वो नाव चलाना, खेल खेलना और खिलाना.. मजे करते थे हम भरपूर, छल-कपट से थे दूर। खेल-खिलौने, हमारी मिट्टी, नाटक में चंदा मामा को लिखते थे चिठ्ठी.. चोर सिपाही,गिल्ली डंडा,चंगा अठ्ठा मास्साब हमसे कहते थे और पठ्ठा। बरसात में वो भीगना,धूप में वो खेलना, सर्दियों में […]

कितना अच्छा होता बचपन, प्यारी रंग-रंगोली, सबके मन को भाती, उनकी हँसी ठिठोली | चंदन कहें बचपन को , या कहें अक्षत रोली, कितनी प्यारी लगती , तुतलाती मीठी बोली | कितना सहज होता , बच्चों का हँसना रोना , सबसे अच्छा लगता उनको, अपना खेल-खिलौना | मर्जी अपनी नहीं […]

समय की रेत, घटनाओं के हवा महल …!! तारकेश कुमार ओझा यह लेख स्वतंत्र लेखन श्रेणी का लेख है। इस लेख में प्रयुक्त सामग्री, जैसे कि तथ्य, आँकड़े, विचार, चित्र आदि का, संपूर्ण उत्तरदायित्व इस लेख के लेखक/लेखकों का है, मातृभाषा.कॉम का नहीं। बचपन में टेलीविजन के पर्दे पर देखे […]

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वाकई ! इस चमत्कार को नमस्कार है !!   तारकेश कुमार ओझा  यह लेख स्वतंत्र लेखन श्रेणी का लेख है। इस लेख में प्रयुक्त सामग्री, जैसे कि तथ्य, आँकड़े, विचार, चित्र आदि का, संपूर्ण उत्तरदायित्व इस लेख के लेखक/लेखकों का है, मातृभाषा.कॉम का नहीं। क्या आप इस बात की कल्पना कर सकते […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।