ख़्वाबों की कश्तियों में आओ कुछ और सफर कर लें, सारे जहां की दौलत हम अपने नाम कर लें। दौलत वह नहीं, जो तिजोरियों में कैद है, दौलत वह जो खुशबू,फूल,हवाओं में बिखरी है। बदलियों के आंचल से बारिशों में पसरी है, जो फुनगियों से निकली, सूरज की रोशनी में […]

तेरी यादें ज्यों दरिया है, मैं कोई गोताखोर हूँ। तू इश्क़ है या रब मेरा, तुझे देखता हर ओर हूँ॥ तेरा मिलना ज्यों सावन है, मैं चंचल-सा मोर हूँ। तू सरगम है इक प्यारी-सी, मैं रागयुक्त भोर हूँ ॥ तू खुशबू है कुमुदिनी की, मैं तो पत्तों का शोर हूँ। […]

  तेरे अहसास के आगोश में, सोना भी खूबसूरत सपने जैसा लगता है। रातें भी उनींदी-सी लगती है कि, कोसों दूर भाग गई नींद जैसे… मेरा सुकून मुझसे दगा कर गया , इसकी वाजिब वजह हो तुम… हँस पड़ता हूँ कभी-कभी तुझे याद करके यूँ ही… और कभी खो जाता हूँ, हँसते-हँसते तुझमें। आँखें भी मुझसे धोखा कर गई,तेरा ही अक्स दिखाती है हर किसी में… लगता है तेरा वजूद रमा हुआ है मेरे अस्तित्व में, कि पहचान हो जैसे… एक-दूसरे की हम-तुम। बनी रहे ये पहचान सदियों तलक कि तुम भी मेरे अहसास में खो जाओ, कुछ ऐसा करें आओ, कि हम तुमसे पहचाने जाएँ… `मनु` तुम हमसे जाने  जाओ, तुम हमसे जाने जाओ…ll                                                 […]

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अभी-अभी तो निकला था, खेलने,हाथ में गिल्ली-डंडा लिए। अभी-अभी तो ढूँढ रही थी, अम्मां,हाथ में डंडा लिएll अभी-अभी तो डांट रहे थे, बाबूजी, पढ़ने के लिए। अभी-अभी तो मैं कह रहा था, मां से,मेले चलने के लिए ll अभी-अभी तो टोक रहे थे, मास्टर जी,फीस के लिए। अभी-अभी तो बाबूजी […]

जब एक दूसरे की,सोच समान हो, जब एक को,समझने का ज्ञान हो। जब एक दूसरे का,सम्मान हो, तब उस दोस्ती पे,अभिमान हो॥ जब किसी को कोई,तकलीफ हो, तो उसके लिए,हाजिर जान हो। जब कोई समस्या हो, तो उसका तुरंत,आपस में निदान हो॥ दोस्ती स्वार्थसिद्धि की,कोई पूँजी नहीं, बल्कि एक दूसरे […]

एक तरफ कर्त्तव्य रखा हो, दूजे  ओर  रखा अधिकार। तौल करें हम हृदय तुला से, फिर लघु-गुरु का करें विचार॥ छोड़ कर्म को,बस केवल हम, स्वार्थ भावना के आधीन। ऐसे  देश  नहीं    सुधरेगा, जल बिनु नहीं बचेगी मीन॥ हक को भूल,कर्म के पथ पर, मौन खड़े क्यों? कदम बढ़ाए। […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।