सत्ताईस नवंबर शुभ दिन आया।
उन्नीस सौ सात साल कहलाया।।
जन्म वसुधा पर बालक ने पाया।
कायस्थ श्रीवास्तव कुल हर्षाया।।
पिता प्रताप नारायणजी का प्यारा।
माँ सरस्वती देवी का राज दुलारा।
इलाहाबाद नगर, प्रतापगढ़ प्यारा।
धन्य वसुंधरा बाबू पट्टी ग्राम सारा।।
पाणिग्रहण का मंगलमय दिन आया।
श्यामादेवी,तेजी सूरी से ब्याह रचाया।
अमिताभ, अजिताभ पुत्र रत्न पाया।
‘जलसा’ से कुटुम्ब आँगन महकाया।।
लम्बे-लम्बे नीड़ घुँघराले बालों वाले।
व्यक्तित्व कलात्मक हस्ताक्षर वाले।।
‘बच्चन’ तखल्लुस नाम धारने वाले।
छायावादी शैली कवि कहलाने वाले।।
हरिवंशराय नामकरण आपने पाया।
अंग्रेजी, उर्दू, हिंदी सम्मान बढ़ाया।।
साहित्य अकादमी पुरस्कार पाया।
सरस्वती सम्मान, पद्मभूषण पाया।।
फौजी प्रशिक्षण महू,सागर में पाया।
लेफ्टिनेंट बन देश का मान बढ़ाया ।।
विदेश मंत्रालय का आदेश आया।
हिंदी भाषा,भाषा विशेषज्ञ बनाया।।
खादी के फूल, मधुकलश सजाया।
मधुशाला,मधुबाला काव्य सुहाया।।
प्रणय पत्रिका, मधुर मिलन कराया।
जीवन परिचय ‘रिखब’ ने बनाया।।
#रिखबचन्द राँका
परिचय: रिखबचन्द राँका का निवास जयपुर में हरी नगर स्थित न्यू सांगानेर मार्ग पर हैl आप लेखन में कल्पेश` उपनाम लगाते हैंl आपकी जन्मतिथि-१९ सितम्बर १९६९ तथा जन्म स्थान-अजमेर(राजस्थान) हैl एम.ए.(संस्कृत) और बी.एड.(हिन्दी,संस्कृत) तक शिक्षित श्री रांका पेशे से निजी स्कूल (जयपुर) में अध्यापक हैंl आपकी कुछ कविताओं का प्रकाशन हुआ हैl धार्मिक गीत व स्काउट गाइड गीत लेखन भी करते हैंl आपके लेखन का उद्देश्य-रुचि और हिन्दी को बढ़ावा देना हैl