क्यों ?(लघु कथा )

viyanand
अमन और फारूख दोस्त थे। दोनों अलग-अलग सरकारी विभागों में अफसर थे। उनके ऑफिस एक ही बिल्डिंग में अलग-अलग फ्लोर पर थे,पर लंच के समय कैंटीन में रोज मिलते और परस्पर भाभियों के बनाए खाने की तारीफ करते हुए चटखारे ले-लेकर एक-दूसरे का लंच शेयर करते थे।
आज जब दोनों का टिफिन खुला तो अमन बिना कुछ बोले चुपचाप खाने लगा। उसे शांत,परेशान और गंभीर मुद्रा में देख फारुख से नहीं रहा गया- ‘क्यों यार! बड़े चुप-चुप हो,क्या बात है?’
‘कुछ खास नहीं यार।’ ठंडी साँस भरते हुए अमन ने कहा-‘अब तो लगता है सच्चाई और अच्छाई का जमाना ही नहीं रहा।’
‘आखिर हुआ क्या है? कुछ बताओ तो!’
‘यार,आज एक बंदा लाइसेंस बनवाने के लिए मेरे पास आया। मैंने उससे कहा कि जो-जो डाक्यूमेंट्स मांगे गए हैं,वो लेकर आओ,बन जाएगा। तो वह मुझ पर ही भड़क गया,और कहने लगा कि पहले तो ऐसे ही बन जाता था। रिश्वत में ज्यादा पैसों के लिए मैं इस तरह नियम-कायदों की बात कर रहा हूँ। उसने सीधे-सीधे मुझे रिश्वतखोर बना दिया,यार…! बड़ा अजीब है…मुश्किल है…ईमानदारी से जीना।’ अमन ने अपनी पूरी व्यथा व्यक्त कर दी।
‘जानते हो अमन! हमारी सबसे बड़ी प्राब्लम क्या है? वो ये कि…हम समय से ऑफिस आते हैं…पूरी निष्ठा से अपने कर्त्तव्य का निर्वाह करते हैं…ईमानदार हैं….रिश्वत नहीं लेते हैं। दरअसल,हमारा अच्छा होना ही आज के जमाने में लोगों के लिए सबसे बड़ी खराबी है। वो क्या है न,कि उनकी प्राब्लम ये है कि इस भ्रष्ट जमाने में भी खराब,भ्रष्ट और बेईमान न होकर हम इतने अच्छे,सच्चे और ईमानदार क्यों हैं?’
फारूख ने अमन को आज की सोच व मानसिकता समझाने की कोशिश की। अमन भी अब इस विषय पर कुछ सोचने लगा था।
—–
 #विजयानंद विजय

परिचय : विजयानंद विजय की अभिरुचि स्वतंत्र लेखन में है।आपका निवास बक्सर (बिहार) में है और
संप्रति अध्यापन (राजकीय सेवा)की है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।