किसकी हिम्मत है, जो मोदी से बात करे ?

vaidik
आज मैं हरिद्वार में हूं। कल मुझे एक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का उद्घाटन करना है। आज दो महत्वपूर्ण काम यहां हुए। एक तो सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा द्वारा आयोजित ‘अन्तरराष्ट्रीय गुरुकुल महासम्मेलन’ में भाषण हुआ और दूसरा, गंगा की सफाई को लेकर आमरण अनशन कर रहे स्वामी सानंदजी से भेंट हुई। गुरुकुल सम्मेलन में देश भर के आर्यसमाजी विद्वान इकट्ठे हुए और कुछ नेतागण भी आए, जिनमें बिहार के राज्यपाल श्री सत्यपाल मलिक प्रमुख थे। पिछले 60-65 साल में मैंने इतना भव्य आयोजन पहले नहीं देखा ! इसके आयोजक स्वामी आर्यवेश हैं ।  श्री मलिक और स्वामी अग्निवेशजी ने अपने भाषण में संस्कार, संस्कृत और संस्कृति की रक्षा के लिए गुरुकुल प्रणाली की शिक्षा पर बल दिया और यह भी कहा कि आर्यसमाज नहीं होता तो गुरुकुल प्रणाली की शिक्षा ही समाप्त हो जाती। मैंने कहा कि गुरुकुल से पढ़े ब्रह्मचारी रामदेवजी ने देश में जो चमत्कार किया है, क्या कोई विश्वविद्यालय का स्नातक कर सका ? लेकिन गुरुकुल प्रणाली की शिक्षा ऐसी आधुनिकतापूर्ण होनी चाहिए कि जिसे पाने के लिए देश के सर्वाधिक संपन्न और सबल लोगों के बच्चे भी लार टपकाते रहें। अभी तो गुरुकुल सिर्फ गरीबों, ग्रामीणों, पिछड़ों और वंचितों के बच्चों के शरण-स्थल बन गए हैं। ऐसा इसलिए हुआ कि गुरुकुलों द्वारा शिक्षा की नींव तो हम भर रहे हैं लेकिन उस नींव पर हमने आज तक एक भी भवन खड़ा नहीं किया। हमारे गुरुकुलों में आधुनिक शिक्षा भी भरपूर होनी चाहिए। ताकि उनके स्नातकों को बड़े से बड़े रोजगार मिलें, उनके अनुसंधानों से सारी दुनिया चमत्कृत हो जाए और भारत के ही नहीं, विश्व के सबल और संपन्न लोग अपने बच्चों को हमारे गुरुकुलों में पढ़ाने के लिए आवेदन करें। हमारे गुरुकुलों में कृष्ण और सुदामा साथ पढ़ें। ये गुरुकुल सभी धर्मों, जातियों और संप्रदायों के लिए अपने द्वार खोल दें।
स्वामी सानंद ने पांच-छह साल पहले भी गंगा की सफाई के लिए अनशन किया था। जलपुरुष राजेंद्र सिंह इनसे मिलाने मुझे रुद्रप्रयाग ले गए थे। तब पुलिस ने हमें गिरफ्तार कर लिया था। आज स्वामी अग्निवेशजी और मैं उनसे मिले। अभी फिर वे अनशन पर बैठे हैं। उनका कहना है कि गंगा की सफाई के लिए सरकार उचित कानून बनाए और प्रधानमंत्री मुझे लिखित आश्वासन दें तो मैं अनशन तोड़ सकता हूं। वरना यहां से मेरी लाश ही उठेगी। उन्होंने मोदी को दो पत्र लिखे लेकिन कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने मुझसे कहा कि आप मोदी से बात करें। किसकी हिम्मत है और किसमें कूव्वत है कि मोदी से बात करे ?
#डॉ. वेदप्रताप वैदिक

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।