लम्हों की किताब

 nilam dr
आधी रात सन्नाटों की नीरवता में,
व्याकुलता जब बढ़ने लगी
दिल में फिर खलबली-सी,
मचने लगी
दिल की किताब के चंद पन्ने,
पलट गए लम्हों की ओर
चंद किस्से बचपन के
हंस पड़े किलकारी मार।
माँ के आँचल बाप की ऊँगली,
दादी-नानी  की कहानी
चाचा की पीठ बुआ ढीठ,
सबसे निकल जब गलियों
के  गलियारे मित्रों के जमघट।
लुका-छिपी, गुल्ली डण्डा,
कंचों के रंगीले खेल
सतोलिया या मारा-मारी,
वो खेल-खेल में
रुठना मनाना बारी आने पर
दाम की,वो झूठे मौके तलाश
घर भागना,सच बहुत याद आए।
फिर इक पन्ने में जब,
सूखा गुलाब औ’ महक
से मेरा तन-मन सिहर गया,
पलकों की कोर भीग गई
हृदय की वीणा झंकृत हुई,
मन आँखों में वो परी चेहरा
नुक्कड़ के मकां की खिड़की
से पर्दे की ओट से छिपकर
तकता नज़र आया।
इक सफा मोती की बूंदन,
से सज्जित खुशबुओं में
लिपटा नज़र आया,
दुनिया की नज़र औ’ अपनों
की रुसवाई से जिसे छुपाया था।
वो लम्हा भी याद आया,
जब गली के मोड़ पर
डोली सजी  थी इक ओर
इक ओर हम लुटे से
दिल के टुकड़े हाथों में
लिए हालात से पिटे थे।
आज भी हम वहीं खड़े हैं,
वही मंजर है आखों में
बस वक्त का पहिया चलता
-चलता उम्र के पन्ने पलट रहा॥
                                                                           #डॉ. नीलम
परिचय: राजस्थान राज्य के उदयपुर में डॉ. नीलम रहती हैं। ७ दिसम्बर १९५८ आपकी जन्म तारीख तथा जन्म स्थान उदयपुर (राजस्थान)ही है। हिन्दी में आपने पी-एच.डी. करके अजमेर शिक्षा विभाग को कार्यक्षेत्र बना रखा है। सामाजिक रुप से भा.वि.परिषद में सक्रिय और अध्यक्ष पद का दायित्व भार निभा रही हैं। आपकी विधा-अतुकांत कविता, अकविता, आशुकाव्य आदि है।
आपके अनुसार जब मन के भाव अक्षरों के मोती बन जाते हैं,तब शब्द-शब्द बना धड़कनों की डोर में पिरोना ही लिखने का उद्देश्य है।

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मुखौटा

Mon Aug 28 , 2017
मैंने एक शख्स देखा बड़ा ही भोला–भाला, वही आंख वही नाक वही नयन नक्श, मैंने वही देखा जो दिखाई दिया एक नेक इन्सान देखा।   अंदर झांककर देखा वो बड़ा ही भद्दा–सा शैतान था, जो हर किसी को धोखेबाज–फरेबी कहता था सिवाय अपने; मैंने अपने में वो शैतान देखा स्वार्थ देखा।   हैं हम महापापी चेहरे पे मुखौटा लगाकर रहते हैं, दूसरों को प्रवचन देते ढोंगीराम देखा ll                                                             […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।