मोदी जी… आप 8 नवम्बर को सही थे या अब 29 नवम्बर को सही हैं..?

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मोदी जी… आप 8 नवम्बर को सही थे या अब 29 नवम्बर को सही हैं..? कृपया  देश की जनता को बताएं… कालेधन के रद्दी कागज को नोटों के रूप में फिर जिंदा क्यों किया

राजेश ज्वेल (9827020830)

यह लेख स्वतंत्र लेखन श्रेणी का लेख है। इस लेख में प्रयुक्त सामग्री, जैसे कि तथ्य, आँकड़े, विचार, चित्र आदि का, संपूर्ण उत्तरदायित्व इस लेख के लेखक / लेखकों का है, मातृभाषा.कॉम का नहीं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी आपने कालेधन के खिलाफ जो सर्जिकल स्ट्राइक की उसे देश की अधिकांश जनता ने तमाम दिक्कतों के बावजूद सराहा। 8 नवम्बर को रात 8 बजे आपने देश के नाम अपने संदेश में नोटबंदी की घोषणा करते हुए कहा कि आज आधी रात यानि 12 बजे के बाद 1000 और 500 रुपए के चल रहे नोट अवैध हो जाएंगे। इससे ईमानदार जनता, कारोबारी, करदाता, गृहणियां कतई न घबराए और वे अपने पुराने नोट दो दिन बाद से 30 दिसम्बर तक बैंकों और डाक घरों में जाकर जमा कर दें और बदले में 500 और 2000 के नए नोट पा लें। अपने इस संदेश में आपने यह भी स्पष्ट कहा था कि काले कुबेरों को पर्याप्त अवसर दिए गए और उनके लिए आय घोषणा योजना  भी लाई गई, जिसमें कालेधन के खुलासा पर 45 प्रतिशत टैक्स जमा कर बचे 55 प्रतिशत धन को सफेद किया गया। अब सारी मोहलत समाप्त हो गई है और आधी रात से काले कुबेरों का आजादी के बाद से जमा कालाधन कागज के रद्दी टुकड़ों में तब्दील हो जाएगा। 8 नवम्बर के इस संदेश के बाद मोदी जी आपने उत्तरप्रदेश के गाजीपुर में आम सभा को संबोधित करते हुए देश की जनता से 50 दिन मांगे और उस वक्त भी आपने चिल्ला-चिल्लाकर कहा कि कालेधन के कुबेर अपने रद्दी हुए नोट नदियों में बहा रहे हैं और अगर गलत तरीके से कालेधन को सफेद करने के प्रयास किए तो आजादी के बाद से खातों की जांच कराऊंगा। सोशल मीडिया से लेकर आपकी पार्टी और उनसे जुड़े समर्थकों यानि भक्तों ने इस कदम को ऐतिहासिक बताया और अपनी पोस्ट में स्पष्ट लिखा कि कालेधन वालों को पर्याप्त अवसर दे दिए थे और वे फिर भी नहीं सुधरे तो उसमें अब मोदी जी का कोई कसूर नहीं, अब उनका कालाधन पूरा नष्ट होना ही चाहिए। कतार में पिछले 20 दिनों से खड़ी देश की  जनता ने भी तमाम दिक्कतों के बावजूद इस फैसले को स्वीकार किया कि चलो, देश बदल रहा है… जनता ने अपने सफेद धन को पाने के लिए कई घंटों और दिनों तक ये मशक्कत की है, मगर उनकी इस कुर्बानी पर उस वक्त कुठाराघात हो गया जब संसद में नया आयकर संशोधन विधेयक लाया गया और मनी बिल के रूप में उसे बहुमत के आधार पर मंजूर भी कर डाला। इसमें यह प्रावधान किया गया कि अभी कालाधन रखने वाला 50 प्रतिशत टैक्स जमा कर अपना शेष बचा 50 प्रतिशत कालाधन दो किश्तों में सफेद धन के रूप में प्राप्त कर लेगा। 25 प्रतिशत की पहली किश्त उसे अभी और शेष 25 प्रतिशत की 4 साल बाद मिलेगी। अब देश की जनता का लाख टके का सवाल यह है कि जो कालाधन शत-प्रतिशत कागज की रद्दी में नोटबंदी के साथ ही तब्दील हो गया था, उसी रद्दी को वापस नोटों में क्यों बदल दिया गया..? मान लो जिसके एक करोड़ रुपए रद्दी हो रहे थे उसे अभी 25 लाख और शेष 25 लाख बिना ब्याज के 4 साल बाद भी मिले तो उसका तो फायदा ही हो गया। यानि देश को लूटते रहो और आधा हिस्सा देकर छूट जाओ… अब मोदी जी कृपया देश की जनता को यह समझाएं कि आप 8 तारीख तो सही थे, जब कालाधन को कागज की रद्दी कर दिया था या फिर 29 नवम्बर को सही हो, जब इस रद्दी में से 50 प्रतिशत नोटों को फिर जिंदा कर दिया..? नोटबंदी की घोषणा के साथ ही काले कुबेरों ने अपने कालेधन को खपाने के लिए ताबड़तोड़ सोना खरीदा और 40 से 50 प्रतिशत अधिक कीमत भी चुकाई। इतना ही नहीं इन कालेधन वालों ने प्रॉपर्टी के अलावा बचत खातों और गरीबों के जन-धन खातों में भी अपना कालाधन भर डाला। अभी भाजपा और उनसे जुड़े समर्थक यह दलील दे रहे हैं कि इससे सरकार को फायदा ही होगा, जबकि हकीकत यह है कि इसमें सरकार को 50 प्रतिशत का सीधा नुकसान हो रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जितने नोट छापती है उतनी करंसी का मूल्य वह चुकाने के लिए प्रतिबद्ध रहती है। अभी 4 से 5 लाख करोड़ कालाधन 30 दिसम्बर तक बैंकों में जमा न हो पाने का अनुमान लगाया जा रहा था। इसका मतलब यह हुआ कि 4 से 5 लाख करोड़ रुपए की यह बड़ी राशि अंतत: भारत सरकार को ही प्राप्त होती, जिसका उपयोग गरीबों के कल्याण में कर दिया जाता। अब इस राशि में से आधी रात अगर आपने 50 प्रतिशत टैक्स भरवाकर सफेद कर दी तो इतना नुकसान तो भारत सरकार को हो गया और बदले में कालेधन वाले को आधी राशि फिर से प्राप्त हो गई, जिससे यह संदेश भी जाएगा कि भ्रष्टाचार करते रहो। सरकारें इसी तरह की छूटें देती रहेंगी। अगर किसी ने हत्या की है तो उसकी सजा उम्रकैद या फांसी ही होती है… इसी तरह भ्रष्टाचार करने वाले को भी तभी कड़ी सजा मिलेगी, जब उसका शत-प्रतिशत कालाधन नष्ट हो जाए। अभी नोटबंदी के साथ यह दलील भी दी गई कि इससे जाली नोट, नक्सलवादियों तथा आतंकवादियों के पास जमा करोड़ों रुपए भी रद्दी हो जाएंगे। अब 50 प्रतिशत छूट के चलते नक्सलवादी और आतंकवादी भी अपने पुराने नोट बदलवा लेंगे। किसी भी नोट पर किसी का नाम नहीं लिखा होता है और जिन नेटवर्क के जरिए इन आतंकवादियों और नक्सलियों को पैसा पहुंचता है उसी नेटवर्क के जरिए पुराने नोटों को बैंकों में जमा कर 25 प्रतिशत राशि अभी और 25 प्रतिशत राशि 4 साल बाद ये तत्व भी हासिल कर लेंगे।

(लेखक परिचय : इंदौर के सांध्य दैनिक अग्निबाण में विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत् और 30 साल से हिन्दी पत्रकारिता में संलग्न एवं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के साथ सोशल मीडिया पर भी लगातार सक्रिय)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।