गणतंत्र दिवस विशेष- व्यथा दिवस की

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सभी अधिकारों का रक्षक अपना यह गणतंत्र पर्व है,
प्रजातंत्र ही मंत्र हमारा हम सब को इस पर गर्व है।
आज़ादी के दीवानों का स्वप्न सच कर दिखाएँगे,
ऐसे हम स्वाभिमान से गणतंत्र दिवस मनाएँगे।

हर्ष, जोश और उमंग संग मैं मन मन मुस्काई,
ख़ुश मुझे देख कामवाली बाई छुट्टी मांगने आई।
कल सब घर पर होंगे, काम भी होगा ज़्यादा,
बदलता पारा देख उसने, किया आने का वादा।

अगले दिन समय पर काम करने वो आई,
भारी मन उसका पर सब काम निपटाई।
जाते-जाते मैंने उसको गणतंत्र वाली लड्डू थमाई,
वास्तव में पिछले दिन के व्यवहार पर मुझे शर्म थी आई।

उसने पूछा, आज किस बात की छुट्टी सप्ताह के बीच,
तिरंगा क्यों फ़हराया है हर गली मोहल्ले बीच?
मैं गर्व से बोली, ‘आज गणतंत्र दिवस है,
हमारे देश को संविधान आज मिला था।’

मैंने उसे गणतंत्र दिवस से अवगत कराया,
तो उसकी आँखों में एक प्रश्नचिह्न पाया।
वो बोली जानती नहीं इस बारे में,
उम्र मेरी बीती है गरीबी के बाड़े में।

जिसकी भाग्य में दरिद्रता हो,
उसके लिए इसका क्या अर्थ हो?
मेरे लिए यह दिन वैसे ही आम है,
मुझको कहाँ छुट्टी, कहाँ आराम है?

सुनकर उसकी बात मैं तनिक सकपकाई,
देख उसकी आँखें बात मुझे समझ में आई।
‘कल जल्दी आना’, कहकर मैंने सहजता दिखलाई,
जाते-जाते अनेक सारगर्भित विचारों का द्वार खोल गई।

सुष्मिता द्वारकानी माहेश्वरी

अहमदनगर, महाराष्ट्र

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।