गणतंत्र दिवस विशेष- गणतंत्र दिवस हमारा है

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26 जनवरी गणतंत्र दिवस हमारा
शहीदों ने, क्रांतिकारियों ने
अपना सर्वस्व लुटा कर
देश को आज़ाद कराया
बुज़ुर्ग देशभक्तों ने
जनता को शामिल कर
भारत का संविधान बनाया
26 जनवरी 1950 से
पूरे देश में लागू हुआ
इसीलिए 26 जनवरी
गणतंत्र दिवस कहलाया
26 जनवरी गणतंत्र दिवस है हमारा।

आज़ादी के बाद हमने
अपने अधिकारों को पाया
संविधान नियमों का संकलन है
इसको हमने गणतंत्र दिवस पर
उपहार रुप में पाया
देश की शासन का है ये सहारा
इसके नियमों का पालन करके
हमें अपने कर्त्तव्यों को निभाया
26 जनवरी गणतंत्र दिवस है हमारा।

बलिदानियों के त्याग का हमें
सम्मान करना है
देश की रक्षा के खातिर
नियमों का पालन करके
देश की उन्नति में हमें अपना
हाथ बंटाना है।

अपने अधिकारों का
सही उपयोग करके
देश की उन्नति को
ऊँचे शिखर तक पहुंचाकर
गणतंत्र दिवस को सार्थक बनाना है।

जय हिंद जय भारत कहकर
भारत का गौरव बढा़ना है
भारत का नाम रोशन करके
विश्व में सर्वोत्तम लोकतंत्र है
साबित करके दिखलाना है
26 जनवरी गणतंत्र दिवस हमारा है
उत्साह उमंग के साथ हमें मनाना है।

विजया रिंगे

बेंगलुरु, कर्नाटक

परिचय

नाम..विजया रिंगे
शिक्षा..बीएच एसी बीएड, (माध्यम मराठी हिंदी)
सम्प्रति..केन्द्रीय विद्यालय से सेवानिवृत्त शिक्षिका कार्यकाल 35वर्ष
लेखन…2020से,कविता, कहानी,लेख लघुकथा,भजन, बालगीत,समीक्षा करना।
सदस्य….संस्कृति साहित्य मंच , अखंड संडे, शुभसंकल्प इंदोर ,अ.हिन्दी.प.इंदोर, कमलीना फाऊंडेशन बैंगलोर ,अन्य।
सभी पटल पर सम्मान पत्र एवं प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कार।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।