सी ई पी आर डी द्वारा पर्यावरण केंद्रित काव्य गोष्ठी आयोजित

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इन्दौर। सी ई पी आर डी (पर्यावरण विकास केंद्र) द्वारा शनिवार को कुंती माथुर सभागार में पर्यावरण केंद्रित साहित्य गोष्ठी में लब्ध प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने पर्यावरण के प्रति आदर और समर्पण भाव से हृदय स्पर्शी रचनाओं का पाठ किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता ढोबले और संचालन संस्था के संयोजक सत्यनारायण मंगल ने किया।
इस गोष्ठी में शैलेन्द्र जोशी ने कटाक्ष किया “तू समंदर है पर बूंद काफी हूं मैं, तू तो खारा है पर प्यास बुझाती हू मैं।” रामनारायण सोनी की अत्यंत मार्मिक रचना ” सिलवटों के पार से कुछ अनकही बातें सुनाऊं,पांव के छाले छुपाकर जूती या ला कर दी उसे ,सुनाकर आंखे नम कर दी। अशोक द्विवेदी ने हमारी संस्कृति का बखान यू किया ‘सिंहो का करते अभिनंदन, सांपो को दूध पिलाते हैं। चंदन रोली कर पत्थर को भगवान बनाते हैं।’ राज संधेलिया ने आभार जताया “झुक झुक कर मीठे फल देते, चुभ चुभ कर पत्थर खाते पेड़।”
प्रारंभ में रविन्द्र ढोबले ने शास्त्रीय स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। संचालक सत्यनारायण मंगल ने “संतुलित भोजन” नामक लघु कथा सुनाकर समाज में व्याप्त गरीबी का मार्मिक चित्रण किया। उनके द्वारा संस्था के कार्यकलापों की जानकारी भी दी गई।
आयोजन में योगेन्द्र जोशी दैनिक अवंतिका, वरिष्ट कवि ओम उपाध्याय, ओम जोशी बब्बू, एम पी शर्मा आदि ने अपनी रचनाओं से कार्यक्रम को समृद्ध किया। अंत में आभार दिनेश जिंदल द्वारा व्यक्त किया गया।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।