किसान

0 0
Read Time2 Minute, 18 Second

हल किसान का नहिं रुके, मौसम का जो रूप हो।
आँधी हो तूफान हो, चाहे पड़ती धूप हो।।

भाग्य कृषक का है टिका, कर्जा मौसम पर सदा।
जीवन भर ही वो रहे, भार तले इनके लदा।।

बहा स्वेद को रात दिन, घोर परिश्रम वो करे।
फाके में खुद रह सदा, पेट कृषक जग का भरे।।

लोगों को जो अन्न दे, वही भूख से ग्रस्त है।
करे आत्महत्या कृषक, हिम्मत उसकी पस्त है।।

रहे कृषक खुशहाल जब, करे देश उन्नति तभी।
है किसान तुमको ‘नमन’, ऋणी तुम्हारे हैं सभी।।


उल्लाला छंद विधान –

उल्लाला द्वि पदी मात्रिक छन्द है। स्वतंत्र रूप से यह छंद कम प्रचलन में है, परन्तु छप्पय के 6 पदों में प्रथम 4 पद रोला छंद के तथा अंतिम 2 पद उल्लाला के होते हैं। इसके दो रूप प्रचलित हैं।

(1) 26 मात्रिक पद जिसके चरण 13-13 मात्राओं के यति खण्डों में विभाजित रहते हैं। इसका मात्रा विभाजन: अठकल + त्रिकल(21) + द्विकल है। अंत में एक गुरु या 2 लघु का विधान है। इस प्रकार दोहा के चार विषम चरणों से उल्लाला छन्द बनता है। इस छंद में 11वीं मात्रा लघु ही होती है।

(2) 28 मात्रिक पद जिसके चरण 15 -13 मात्राओं के यति खण्डों में विभाजित रहते हैं। इस में शुरू में द्विकल (2 या 11) जोड़ा जाता है, बाकी सब कुछ प्रथम रूप की तरह ही है। तथापि 13-13 मात्राओं वाला छन्द ही विशेष प्रचलन में है। 15 मात्राओं वाले उल्लाला छन्द में 13 वीं मात्रा लघु होती है।

तुकांतता के दो रूप प्रचलित हैं।
(1)सम+सम चरणों की तुकांतता।
(2)दूसरा हर पंक्ति में विषम+सम चरण की तुकांतता। शेष नियम दोहा के समान हैं।

बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’
तिनसुकिया

matruadmin

Next Post

एक ख़त पुराने दोस्तों के नाम

Mon Aug 2 , 2021
क्या करे तुम्हारे घर आकर हम, अब तो याद नहीं करते हमे तुम। हम सदा आते थे,जब कभी बुलाते थे तुम, अब बुलाना छोड़ दिया,अब आए क्यो हम। याद करते रहते है हम ये जानते हो तुम, हिचकियां आती रहती है ये जानते है हम। ये मेरा घर नहीं है,तुम्हारा […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।