वर्षा ऋतु

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छाए फिर बादल असाड़ के ,वर्षा ऋतु का हुआ आगमन!
मिट्टी की सोंधी सोंधी खुशबू संग प्रसन्न हो रहा मेरा मन।।

रिमझिम रिमझिम बारिश गिरे सब बीमारी और कष्ट मिटे ,
गर्मी से जो झुलस गया था उस तन की हर व्याधि हटे ।।

जेठ माह के बाद किसान आषाढ़ माह की राह तकते,
कब बादल आए बारिश के, उनके खेतों पर मेघ गिरे।।

प्रिय महीना है भगवन का ,तुलसी हर घर खूब फले,
करके आराधना सूर्य देव की ,मंगल के सारे कष्ट मिटे।।

आषाढ़ माह के शुरु होते है ,काले बादल गरज रहें,
चमक रही है दामिनी नभ में, चहुं ओर ये शोर करे।।

वर्षा ऋतु के आगमन से ही चित प्रसन्न हो जाता है,
हरी चुनर ओढ़कर प्रकृति का श्रंगार पूर्ण हो जाता है।।

यह माना आषाढ़ में बादल से अमृत थोड़ा कम बरसता है
पर हर किसान का मन इसी अमृत के लिए ही तरसता है।।

नई नई कोपलों का हो रहा जन्म पौधे हो रहे है सब प्रसन्न
जैसे आषाढ महा के आने से धरती पर आया हो यौवन।।

प्रतिभा दुबे
ग्वालियर (मध्य प्रदेश)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।