कोरोना से लड़ना है तो ऑनलाइन चलना है

कोरोना ने लोगों को बता दिया है कि कोरोना से लड़ना है तो ऑनलाइन चलना है।
बगैर ऑनलाइन चले कोरोना से दो-दो हाथ नहीं किया जा सकता। सामान खरीदना है
तो ऑनलाइन खरीदो। कोरोना के अलावा अन्य बीमारियों से भी लड़ना है तो
ऑनलाइन डाक्टरी सलाह पर निर्भर रहना होगा क्योंकि सरकारी अस्पताल सहित
अन्य अस्पतालों में अब सिर्फ कोरोनो संक्रमितों का इलाज किया जा रहा है।
अस्पताल में आउटडोर बंद हैं। चिकित्सक आउटडोर में बैठने से कतरा रहे हैं।
यहां तक कि निजी क्लिनिक वाले चिकित्सक भी घर में दुबके पड़े हैं। यहां तक
कि कुछ चिकित्सक मरीजों को ऑनलाइन चिकित्सीय सलाह देने से मना कर रहे
हैं। कुछ चिकित्सक जो अपनी पेशा की लाज बचाये हुए है वे ऑनलाइन सेवा दे
रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से बीमारी के बारे में जानकारी देने पर
दवा के संबंध में सलाह दे रहे हैं। फेसबुक में भी अब चिकित्सीय सलाह देने
वाला एक नया अस्पताल खुल गया है। समस्याएं बताओ तो सलाह देने वाले हजारों
तैयार बैठे हैं। इस बीमारी में यह दवा लीजिए, ऐसे दवा खाइये और ऐसे ठीक
हो जाइये।
कोरोना से लड़ने के लिए ऑनलाइन दवा खरीदो, ऑनलाइन आॅक्सीजन खरीदो, ऑनलाइन
पीपीई किट्स खरीदो यहां तक कि एंबुलेस भी ऑनलाइन ही आते हैं। अभी तक
मरीजों को एंबुलेस में लादने के लिए रोबोर्टस का इंतजाम नहीं किया गया है
अन्यथा एंबुलेंस के साथ रोबार्टस आते और मरीज को एंबुलेंस में लादकर
अस्पताल ले जाते।
लॉकडाउन के कारण कई राज्यों में दो पहिया और चार पहिया वाहनों के लिए
ऑनलाइन इ पास की व्यवस्था की गयी है। बगैर इ पास के कोई भी वाहन शहर में
नहीं निकल सकता। अगर बगैर इ पास के बाहर निकलता है तो इ चालानधारी पुलिस
उसका इ चालान काट देती है। और उसे फाइन भी ऑनलाइन भरना पड़ता है। इसके लिए
सरकार की ओर से इ पास पदाधिकारी की व्यवस्था की गयी है जिसका काम सिर्फ इ
पास बनाना है।
इससे जाहिर होता है कि लोगों के साथ-साथ सरकार की निर्भरता भी ऑनलाइन
प्लेटफार्म पर बढ़ गयी है। अगर देश का यही हाल रहा तो आने वाले समय में कई
ऑनलाइन अस्पताल खुलेंगे। तब वहां के ऑनलाइन चिकित्सक लोगों को सलाह देंगे
कि ऑनलाइन बच्चे पैदा करो। अगर आप उनसे पूछेंगे कि ऑनलाइन बच्चे कैसे
पैदा होगा तो उनका जवाब होगा- जब ऑनलाइन शादी हो सकती है, ऑनलाइन प्रेम
का इजहार किया जा सकता है, ऑनलाइन विवाह योग्य लड़के लड़कियों का चुनाव
किया जा सकता है,शादी के बाद ऑनलाइन वर-बधु को आशीर्वाद दिया जा सकता है
तो ऑनलाइन बच्चे कैसे पैदा नहीं किया जा सकता। अब तो स्कूल बंद है और
ऑनलाइन शिक्षक से लेकर छात्र तक मिल रहे हैं। इ पुस्तक से लोग अपना ज्ञान
बढ़ा रहे हैं। अब तो कोरोना से मरने वालों के अंतिम संस्कार का नजारा भी
परिजनों को ऑनलाइन दिखाया जा रहा है। अंतिम संस्कार के बाद दिवंगत आत्मा
को ऑनलाइन श्रद्धांजलि दी जा रही है और आनलाइन श्राद्ध भी किया जा रहा
है। कोरोना भी अब समझ चुका है कि उसके आने से सभी प्रकार की बीमारियां
मैदान छोड़कर भाग चुकी हैं। अब तो ऑनलाइन के मरीज बीमारी के भंडार से बाहर
आने वाले हैं। वे बाहर आकर बतलायेंगे कि कोरोना से लड़ना है तो ऑनलाइन
चलना है।

नवेन्दु उन्मेष
रांची (झारखंड)

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।