सकारात्मक और मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता के आधार स्तंभ थे स्व.कमल दीक्षित

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भाषाई पत्रकारिता के सबसे बड़े आधार स्तंभ स्व. प्रोफेसर कमल दीक्षित एक प्रयोगधर्मी, रचनाधर्मी और विकासगामी पत्रकारिता के पैरोकार थे। वे एक सहज, सरल इंसान थे और पत्रकारिता के चलते-फिरते स्कूल थे। वे फक्कड़ पत्रकार और मूल्य आधारित पत्रकारिता में सबसे अग्रणी थे। आंचलिक पत्रकारिता को बढ़ावा देने में उनका बहुत योगदान है। वे एक पत्रकार ही नहीं दार्शनिक भी थे। उनके जाने से हिन्दी पत्रकारिता को एक अपूरणीय क्षति पहुंची है। यह बात इंदौर प्रेस क्लब एवं ब्रह्माकुमारीज मीडिया प्रभाग इंदौर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने कही।
मुख्य क्षेत्रीय समन्वयक इंदौर जोन की ब्रह्मकुमारीज हेमलता दीदी ने कहा कि स्व. दीक्षित सकारात्मक पत्रकारिता और मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता के आधार स्तंभ थे। उन्होंने प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्थान में रहकर देशभर के पत्रकारों को जोड़ा और संस्थान के माउंट आबू मुख्यालय में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली कान्फ्रेंस में शामिल किया।
इंदौर प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी ने कहा कि स्व. दीक्षित ने भाषाई पत्रकारिता को परिष्कृत करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। उन्होंने हमेशा मूल्यों की पत्रकारिता की और सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। नई पीढ़ी को उनसे सीख लेना चाहिए।
पूर्व कुलपति डॉ. मानसिंह परमार ने कहा कि स्व. दीक्षित एक रचनाधर्मी और प्रयोगधर्मी पत्रकार थे, जिन्होंने मूल्य और आध्यात्मिक आधारित पत्रकारिता को खूब बढ़ावा दिया और नकारात्मक पत्रकारिता से हमेशा दूरी बनाकर रखी। उन्होंने आंचलिक या ग्रामीण पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए भरसक प्रयत्न किए, ताकि पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनी रहे।
वरिष्ठ पत्रकार जीवन साहू ने कहा कि 70 के दशक में जब अंग्रेजी पत्रकारिता हावी थी, उस दौर में स्व. दीक्षित ने हिन्दी पत्रकारिता को स्थापित करने के लिए पत्रकारों की कार्यशालाएं और सेमिनार आदि आयोजित किए। उनका मानना था कि जब तक भाषाई पत्रकारिता में मूल्यों और सिद्धांतों की बात नहीं होगी, तब तक हम राजनीति या किसी अन्य क्षेत्र में सुधार नहीं ला सकते। उन्होंने आगे कहा कि इंदौर प्रेस क्लब और प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज संस्थान मिलकर स्व. दीक्षितजी की पुण्यतिथि पर मूल्यानुगत पत्रकारिता विषय पर एक बड़ा आयोजन करें।
वरिष्ठ पत्रकार तपेन्द्र सुगंधी ने कहा कि स्व. दीक्षित पत्रकारिता के शिक्षक थे और एक चलते फिरते स्कूल-कॉलेज थे। वे हिन्दी पत्रकारिता के सच्चे मनीषी थे। वे उदार मन से सबसे मिलते और हमेशा यही कहते कि पत्रकारिता में कुछ नया करो और अपनी एक विशेष पहचान बनाओ।
वरिष्ठ भाजपा नेता गोविंद मालू ने कहा कि स्व. दीक्षित पत्रकारिता की नर्सरी से लेकर विश्वविद्यालय थे। उन्होंने पत्रकारिता में व्यवसायिकता को कभी हावी नहीं होने दिया और नए पत्रकारों को हमेशा तराशते रहे।
वरिष्ठ पत्रकार क्रांति चतुर्वेदी ने कहा कि स्व. दीक्षित फक्कड़ पत्रकार और पत्रकारिता के प्रकाश स्तंभ थे। उनके लिए प्रोफेसर और संपादक होना सबसे आसान बात थी, क्योंकि वे इससे भी बढ़कर थे। उनके विचारों का फैलाव आज भी चारों ओर है।
वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा ने कहा कि स्व. दीक्षित एक सहज, सरल व्यक्ति थे। जिन्होंने मूल्यानुगत मीडिया को बढ़ावा देने के लिए कोई कसर नहीं रखी। वे राजनीति में भी सुधार लाना चाहते थे।
वरिष्ठ पत्रकार रतनलाल गुप्ता ने कहा कि स्व. दीक्षित विचारशील व्यक्तित्व के धनी थे।
वरिष्ठ पत्रकार मुकेश तिवारी ने कहा कि स्व. दीक्षित में सबको जोडऩे की कला थी और वे सबको साथ लेकर चलते थे।
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण जोशी ने कहा कि स्व. दीक्षित नए पत्रकारों को तराशने में बेजोड़ थे और उनमें भाषा के संस्कार के साथ मूल्यों की गहरी समझ थी।
समाजसेवी किशोर कोडवानी ने कहा कि स्व. दीक्षित पत्रकारिता के बहुत बड़े संस्थान थे। उन्होंने कई नए पत्रकारों की एक पीढ़ी तैयार की, जो इंदौर से लेकर भोपाल, जयपुर, नागपुर, रायपुर में कई बड़े संस्थानों में कार्यरत हैं।
वरिष्ठ पत्रकार उज्जवल शुक्ला ने कहा कि भाषाई पत्रकारिता को आगे बढ़ाने में स्व. दीक्षित ने जीवनभर प्रयास किया और पूरी की पूरी पीढ़ी तैयार कर दी।
समाजसेवी प्रकाश व्यास ने कहा कि हम पत्रकारों को चाहिए कि स्व. दीक्षित के पुण्य स्मरण पर कुछ ऐसे आयोजन किए जाएं, ताकि नई पीढ़ी उनके विचारों से अवगत हो सके।
वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र वैद्य ने कहा कि स्व. दीक्षित सदैव हंसते-मुस्कराते और बातों-बातों में नया कुछ सिखा देते थे। वे खांटी के पत्रकार थे।

कार्यक्रम का संचालन प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी ने किया। आभार माना स्व. दीक्षित गौरव भार्गव ने। समापन पर अनिता बहन ने सभी को राजयोग कराया। कार्यक्रम के अंत में सभी स्व. दीक्षित के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि सभा में ब्रह्मकुमारीज अनिता बहन, प्रेमलता बहन, उषा बहन, देवमणि बहन ब ब्रह्मकुमार नारायण भाई, भूषण भाई, रवीन्द्र भाई, किशोर भाई, इंदौर प्रेस क्लब महासचिव हेमन्त शर्मा, उपाध्यक्ष प्रदीप जोशी, कोषाध्यक्ष संजय त्रिपाठी, कार्यकारिणी सदस्य अभय तिवारी, राहुल वावीकर, हर्षवर्धन प्रकाश, कमल हेतावल, सूरज उपाध्याय, हेमन्त पाल, रोहित तिवारी, महेश मिश्रा, संजय सोलंकी, बृजभूषण चतुर्वेदी, लोकेन्द्र थनवार, राजेन्द्र कोपरगांवकर, लक्ष्मीकांत पंडित, सचिव शर्मा, सुरेन्द्रसिंह पंवार, मोहनसिंह नरवरिया, मदनलाल दुबे, शिवप्रसाद चौहान, मुकेश जैन, सुधाकर सिंह, प्रकाश तिवारी सहित बड़ी संख्या में पत्रकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।