माता पिता और गुरु

Read Time0Seconds

माता-पिता ने पैदा किया,
पर दिया गुरु ने ज्ञान।
लाड़-प्यार दिया
दादा-दादी ने।
पर गुरु ने दिया
अच्छे बुरा का ज्ञान,
उठे हृदय में
जब भी विकार।
तब उन्हें गुरु ने
कर दिया शांत,
तभी तो कहता हूँ
मैं कि आचार्यश्री हैं
इस युग के भगवान।

गुरु ही साँस और
गुरु ही आस है,
गुरु ही प्यास और
गुरु ही ज्ञान है।
गुरु ही संसार और
गुरु ही प्यार है,
गुरु ही गीत और
गुरु ही संगीत है
तभी तो लगी
गुरु से हमारी प्रीत।।

गुरु ही जान है,
गुरु ही आलंबन है,
गुरु ही दर्पण और
गुरु ही धर्म है।
गुरु ही कर्म और
गुरु ही मर्म है,
बिना गुरु के
कुछ भी नहीं है
तभी तो हृदय में
गुरु ही गुरु बसे हैं।।

गुरु ही सपना और
गुरु ही अपना है,
गुरु ही जहान और
गुरु ही समाधान है।
गुरु ही आराधना और
गुरु ही उपासना है,
गुरु ही आदि और
गुरु ही अन्त हैै
तभी तो गुरु के
प्रति जगा है प्रेम अनंत।

गुरु ही साज और
गुरु ही वाद्य है,
गुरु ही भजन और
गुरु ही भोजन है।
गुरु ही जप और
गुरु ही वंदना है,
गुरु ही प्यारा और
गुरु ही न्यारा है
इसलिए तो आत्मा में
वो समाया है।।

गुरु ही वन्दना और
गुरु ही मनन है,
गुरु ही चिंतन और
गुरु ही वंदन है।
गुरु ही चन्दन और
गुरु ही नंदन है,
तभी तो सब करते
गुरु का ही अभिनन्दन॥

(आचार्यश्री विद्यासागर जी को समर्पित)

जय जिनेंद्र देव
संजय जैन (मुंबई)

0 0

matruadmin

Next Post

गणेश चतुर्थी पर्व

Sun Jan 31 , 2021
आज गणेश चतुर्थी है संकट मोचन भगवान की, जो रक्षा करते हैं तुम्हारी और तुम्हारी संतान की। बनाओ इस दिन तिल गुड चावल से अच्छे पकवान जी, इनसे इनका भोग लगाओ जो खुश हो जाए भगवान जी। रखो व्रत इस दिन तुम और खैर मांगो संतान की, संकट मोचन नाम […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।