बढ़ती सब्जीयों की कीमत से आमजनों में आक्रोश।

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हरी सब्जी आलू प्याज की वेतहाशा मूल्य वृद्धि से आमजन को खासी परेशानियों का सामान करना पड़ रहा है।जहाँ प्याज की कमत 70-80 रू• आलू 50 तो हरी सब्जी 80 पर केजी बिक रही है।

एक तो लाकडाउन की मार और अब वेतहाशा मूल्य वृद्धि ऐसा लगता है आमजन नमक रोटी खाने पर विवश हो जाएंगे ।बाढ और सुखाड़ तो यहां प्रत्येक वर्ष आती है लेकिन इस तरह की वेतहाशा उछाल कभी नही हुई।

जो लोग रोज कमाते है उनके कमाई का साधन भी पर्याप्त नही है जबकि यह वेतहाशा मूल्य वृद्धि एक गहरी मुसीबत बन गया है।आखिर कम कमाने वाला दो- तीन सौ की सब्जी कैसे रोज खरीदे? आज का यह सबसे अहम और चुनौतीपूर्ण मसला है जिस पर सरकार के स्तर पर अविलंब ध्यान देने की जरूरत है।

आमजन का फल तो नही पर सब्जीयां उनका मुख्य आहार है पर वो भी उनकी पहुँच से बाहर जाता दिख रहा है। ऐसे हालात के आखिर जिम्मेदार कौन? क्यों नही कोल्ड स्टोरेज में पर्याप्त मात्रा में स्टाक रखे गये आखिर सरकारें क्यों सोती रही हैं ।

विगत एक माह से यह स्थिति बरकरार है और अभी बाजार की स्थिति से नही लगता कि किसी तरह की मूल्य घटने के चांसेज है ।आखिर यह मंहगाई की मार कबतक पड़ती रहेंगी जबकि सरकार के तमाम मशीनरी चुनाव में मस्त हैं।

                              आशुतोष 
                           पटना बिहार

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।