
बेटी को अपनी यारों रानी बना दो तुम
तूफान से टकराये मर्दानी बना दो तुम
नारी है रूप शक्ति का अबला नहीं है वो
जीतेगी हर जंग को तूफानी बना दो तुम
हाथ मे कटार हो और तलवार थाम लें
शौर्य की कुछ ऐसी कहानी बना दो तुम
मुल्क की हमारे हिफाज़त वो अब करें
पढ़ा लिखाकर उसको सयानी बना दो तुम
गौरव उसकी गाथा का बखान सब करें
हर किसी की उसको जुबानी बना दो तुम
-किशोर छिपेश्वर”सागर”
बालाघाट

