सत्ता के रसगुल्ले और अमर सिंह …!!

0 0
Read Time2 Minute, 57 Second
tarkesh ojha
tarkesh ojha

जिस तरह मुलायम सिंह यादव हैं उसी तरह पहले अमर सिंह चौधरी हुआ करते थे . राजनीति में पदार्पण के बाद काफी समय तक उनका यही पूरा नाम था . धीरे – धीरे वे अमर सिंह नाम से जाने – पहचाने लगे . वाकई बड़े दिलचस्प इंसान थे . राजनीति में पैसा और पावर के साथ ग्लैमर को जोड़ने वाले अनूठे राजनेता . अपने स्वर्ण काल में उनमें पता नहीं ऐसी कौन सी जादुई शक्ति थी , जो नकचढ़े तमाम सेलिबर्टी उनके एक इशारे पर खुशी – खुशी समाजवादी पार्टी की लाल टोपी पहनने को तैयार हो जाते थे . वाकपटुता और हाजिर जवाबी में भी उनकी कोई सानी नहीं थी .२००६ में बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान चर्चित अभिनेत्री जया प्रदा के साथ वे मेरे शहर आए तो उन्हें नजदीक से देखने का मौका मिला . इस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने पश्चिम बंगाल की कुछ सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे . खड़गपुर शहर से दलीय उम्मीदवार थे सत्यदेव शर्मा . रावण मैदान में चुनावी सभा थी . तब चैनलों पर छाए रहने वाले अमर सिंह को बालीवुड. अभिनेत्री जया प्रदा के साथ देखने का अवसर मणि – कांचन संयोग की तरह था . क्योंकि रूपहले पर्दे पर हम उन्हें बचपन से देखते आ रहे थे . मीडिया से जुड़े होने के चलते हमारा उनसे रू ब रू होना भी तय था . निश्चित दिन वे जया प्रदा व अन्य सपा नेताओं के साथ सड़क मार्ग से कोलकाता से खड़गपुर रवाना हुए . हालांकि उन्हें रास्ते में देर हो गई . फिर भी मुंबई रोड स्थित एक होटल में उनके रुकने की व्यवस्था थी . यहीं उनसे हमारी मुलाकात होनी थी . खड़गपुरिया चाय की चुस्कियों के बीच संक्षिप्त बातचीत का अवसर मिला . किसी ने सपा उम्मीदवारों की दल बदल प्रवृत्ति पर सवाल किया . इस पर अमर सिंह ने तब के तमाम बड़े राजनेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सत्ता के रसगुल्लों के लिए जब इतने बड़े – बड़े नेता चोला बदल लेते हैं तो हमारे उम्मीदवारों की क्या बिसात … स्वर्गीय अमर सिंह को विनम्र श्रद्धांजलि ….

तारकेश कुमार ओझा
लेखक पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में रहते हैं और वरिष्ठ पत्रकार हैं।

matruadmin

Next Post

रक्षा बन्धन पर्व

Sun Aug 2 , 2020
बहन भाई नही, युगल का भी इतिहास मिलता है राखी में रक्षा करे जो संकट काल मे संकल्प करता वही राखी में शचि ने पति इंद्र की रक्षा को राखी का कवच पहनाया था कर्णावती ने बादशाह हुमांयु को राखी भेजकर भाई बनाया था राजकुमारी बहन की रक्षा के लिए […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।