रामायण

naveen kumar bhatt

रामायण की सुनिए वाणी।
पाप मुक्त हो जाता प्राणी।
रहमत की आधार सिला ये,
जन-जन की ये कल्याणी।।१

सतियों की है अमर कहानी।
गाथाओं की है भरी रवानी।
विपदाओं को ये दूर हटाकर,
छोड़ी अपनी अलग निशानी।।२

सुख-दुख की विपदाये झेले।

प्राणी बनकर भगवन खेले।
परम विवेकी मानव जीवन,
नीर अजब करिश्मों के ठेले।।३

धर्म के खातिर जीते – मरते।
अंतिम साँसों तक है लड़ते।
देश के खातिर मिट जाने की,
“नीर” नहीं लड़ाई से है डरते।।४

दिये वचन को यूँ नहिं तोड़ो।
अडिग रहे हम नाता जोड़ो।
सतत प्रेरणा अलख जगा के,
ये बीच धार पे यूँ मत छोड़ो।।५

हर योंनि में पुरूष बड़ा है।
संकट के क्षण पर खड़ा है।
हर सारों का भरा खजाना,
ये जानें वही जो इसे पढ़ा है।।६

धर्म अधर्म की परिभाषा है।
यही अंतर्मन अभिलाषा है।
मित्रों का क्या फर्ज है होता,
नीर ये निर्देशों की पासा है।।७

इसमें थे भरे अनेकों नायक।
सफल प्रेरणा के हक दायक।
कोई नीत से कार्य किये तो,
कोई स्वयं के थे निर्णायक।।८

माया,कपट,अनीति माहिर।
ऐसे कितनें थे जग जाहिर।
समय का पहिया रूके नहीं,
सबको कर देता वह हाजिर।।९

#नवीन कुमार भट्ट

परिचय :

पूरा नाम-नवीन कुमारभट्ट
उपनाम- “नीर”
वर्तमान पता-ग्राम मझगवाँ पो.सरसवाही
जिला-उमरिया
राज्य- मध्यप्रदेश 
विधा-हिंदी

 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

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