जैसे टीवी निगल गया रेडियो को वेसे ही नेटफ्लिक्स निगल जाएगा टीवी को ?

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दोस्तो
बात  80 के दौर से शुरू करते जब खबरे पहुचने सबसे आसान और सुलभ साधन होता था रेडियो, जिस पर लोगो को हमने कान गड़ाए कंधो पर उठाए गाने, कॉमेंट्री, समाचार सुनते देखा था,, फिर आया देश मे 80 का दशक जिसमें टीवी आया,जिस पर मात्र एक चैनल दूरदर्शन चलता था वह भी 9 नम्बर चेनल पर, फिर वक्त आया केबल नेटवर्क का जिसने टीवी यानी बुद्धू बक्सा कहा जाने लगा, लेकिन टीवी ने ऐसे पंख पसारे के घरों के ड्राइंग रूम से कब बैडरूम तक पहुच गया पता ही नही चला, लेकिन टीवी ने अपने मायाजाल में पूरे देश को फांस लिया,फिर दौर आया वीसीआर का यह वह मशीन थी जिसे टीवी से जोड़कर फिल्मे देखी जाती थी, फिर सीडी/डीवीडी प्लेयर आया जो कि टीवी के साथ मिलकर काम करता था,
फिर टीवी की सार्थकता और जनता में पहुच को देखते हुवे कई बड़े कारोबारियों ने नए नए टीवी चैनल बनाए और उस पर अपने अपने संसाधन बना बना कर जनता को परोसना शुरू किए,
हिन्दोस्तान में फिल्मे और टीवी मनोरंजन के सबसे सुलभ साधन मानते हुवे इन नई चेनलो को जनता का प्यार दुलार के साथ अपनापन भी मिला और टीवी किसी भी परिवार का एक अहम हिस्सा बन गया
फिर टीवी चेनल ने अपनी परवाज़ शुरू की जो केवल एक सीमित दायरे में न रहकर फिल्मो, गानों, खेल, समाचार सभी वर्गों में बट गया और इसी तर्ज पर जनता की रूचि अनुसार कार्यक्रम बनने और प्रसारित होने लगे,
और इस तरह टीवी ने अपना सफर घरो के ड्राइंग रूम से बैडरूम तक का तय किया,,
और *टीवी अंततः रेडियो को निगल गया* यानी रेडियो युग हाशिये पर पहुच गया और टीवी का बर्चस्व हर जगह हावी हो गया
यह तो टीवी की गौरवगाथा थी लेकिन असल मुद्दा हमारे बातचीत का अब शुरू होगा
*यानी टीवी को वीडियो ईस्ट्रिमिंग प्लेटफॉर्म निगल जाएगे*
वीडियो ईस्ट्रिमिंग प्लेटफॉर्म क्या होते है यह हम समझ लेते हैं,
यू ट्यूब आप सभी का देखाभाला और इस्तमाल किया हुआ एक इंटरनेट का वीडियो दिखाने वाला अप्लीकेशन प्लेटफॉर्म है जिस पर केवल इंटरनेट के कुछ डिवाइस(उपकरणों) से  वीडियो देखी और डाउनलोड करके सुरक्षित की जा सकती है, इस पर वीडियो अपलोड यानी हमारे द्वारा पोस्ट भी की जा सकती है और यह दुनियाभर में फ्री में अपनी सेवाएं देता है, इस पर वीडियो अपलोड से जब विज्ञापन साथ आते है तो हमे यानी अपलोडर को रिवेन्यू जनरेट होता है यानी पैसे मिलते है,,
यही यूट्यूब इंटरनेट ईस्ट्रिमिंग प्लेटफॉर्म है
अब दुनियाभर में इनका चलन बड़ रहा है युकी ये अपने पंख पसार रहा है
और जनता इनको लेकर खासी उत्सुक भी है, क्योकि यह प्लेटफॉर्म नए नए कन्टेंट बना बना कर परोस रहे है,
*दूसरी बात इन वीडियो ईस्ट्रिमिंग प्लेटफॉर्म पर किसी तरह का केंद्रीय फ़िल्म प्रमाणन बोर्ड (CFCB)का कोई दखल नही है* जिससे कि सेंसर बोर्ड की केचि चले और फ़िल्म में काटछाट हो या इनके कन्टेंट को अलग अलग आयुवर्ग दर्शको को बाट दिया जाए
 *यह हमारे देश के कानून की असमर्थता दर्शाती है*
इस कारण से यह वीडियो ईस्ट्रिमिंग प्लेटफॉर्म बेहूदा, वाहियात से वाहियात कन्टेंट परोसे जा रहे है जब कोई रोकटोक ही नही तो जो चाहे वह परोस दो कानून जब बनेगा तब निपटेंगे
तो यह हमारे देश की सूचना और प्रसारण मंत्रालय की नाकामी और आलस्य का नतीजा भी कहा जा सकता है
क्योकि चायना ने फेसबूक जैसे सोशल साइट को प्रतिबंधित कर रखा है, यू ट्यूब की जगह उसने दूज़री सुविधाए मोहिया करवा रखी है, यह वहां की सजकता की निशानी माना जा सकता है,,
खैर राजनीति इस मुद्दे पर नही करनी है केवल आप तक कल के बदलाव को पहुचाना मुद्दा हैं मेरा
दुनियाभर में वीडियो
ईस्ट्रिमिंग प्लेटफॉर्म के रूप में यू ट्यूब, अमेजॉन, हॉटस्टार, नेटफ्लिक्स, बालाजी, आपको वीडियो ईस्ट्रिमिंग के लिए केवल इंटरनेट-स्क्रीन यानी स्मार्ट फोन चाहिए होता है और साथ ही उस वीडियो ईस्ट्रिमिंग प्लेटफॉर्म का सब्सिक्रिपशन यानी सदस्यता शुल्क लेना होता है जिससे उनका खर्चा निकलता है|
यह ईस्ट्रिमिंग प्लेटफॉर्म फिल्मो और टीवी से बोर हो चुके दर्शको के मनोरंजन का बड़ा सहारा बनते जा रहे है और अब तो टीवी भी ऐसे आ रहे है जिसमे न डिश चाहिए न केवल सीधे इंटरनेट से जुड़े हुवे स्मार्ट टीवी तो आप को टीवी केबल, डिश की उपलब्धता का झंझट खत्म हो चला है सीधे ईस्ट्रिमिंग प्लेटफॉर्म पर पहुँचिये और जो मन मे आए वह देखिये
साथियो वीडियो ईस्ट्रिमिंग प्लेटफॉर्म बिना विज्ञापनों के अपने कार्यक्रम परोसता है साथ ही आप उस कार्यक्रम या प्रसारण कोआगे पीछे करके देखने के साथ डाउनलोड की सुविधा भी देता है जो कि टीवी पर केवल या डिश नही देता,
तो अंततः मेरा यह मानना हैं कि
वीडियो ईस्ट्रिमिंग प्लेटफॉर्म टीवी, केवल, डिश को ठीक उसी तरह निगल जाएगा जेसे टीवी निगल गया रेडियो को ,,,,

#इदरीस खत्री

परिचय : इदरीस खत्री इंदौर के अभिनय जगत में 1993 से सतत रंगकर्म में सक्रिय हैं इसलिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं| इनका परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग 130 नाटक और 1000 से ज्यादा शो में काम किया है। 11 बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में लगभग 35 कार्यशालाएं,10 लघु फिल्म और 3 हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। इंदौर में ही रहकर अभिनय प्रशिक्षण देते हैं। 10 साल से नेपथ्य नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं।

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Mon Feb 18 , 2019
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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।