हिंदुस्तान

diptesh tiwari
उठे शान से अम्बर में तीन रंग का चोला अपनी पहचान हो,
हर युवा हिंदुस्तानी बोल रहा वंदेमातरम गान हो,
झुके शीस गर मेरा तो  मेरे भारत मां को प्रणाम हो,
और विस्वपटल में सबसे ऊँचा अपना हिंदुस्तान हो,
उत्तर में कलकल करती गंगा और पर्वतराज हिमालय है,
ऋषि मुनियों की धरती में कंकण कंकण शंकर और शिवालय है,
दक्षिण में चरण चुम रत्नाकर भी देता भारत मां को सम्मान है,
प्राकृतिक छटा बिखेरे छै ऋतुओं वाला मेरा हिंदुस्तान है,
राम, कृष्ण ,बलराम स्वयं चुम गये जो माटी को,
शत्रु के रक्तो से प्यास बुझी वो राणा वाली घाटी को,
लक्ष्मी दुर्गा और रानी हाड़ा का ये स्वाभीमान है,
बलिदानों के हवनकुंड से उगा आज का हिंदुस्तान है,
बट जाए धार नदी की लेकिन नीर कहाँ बट सकती है,
बट जाए माँ के बेटे लेकिन मां की छीर कहाँ बट सकती है,
हम सब हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख ईसाई एक मां की संतान है,
ऐसे आपस में  कभी न बटने वाली भूमि मेरा हिंदुस्तान है,
हम अब भी वीर वही है जिसने ढेड़लाख सेना को छेड़ा था,
गौरी,तुगलग और हिसंक भेड़ियों को सतरह बार खदेड़ा था,
इस मिट्टी के हर युवा दिल में गूंज रहा जन-गण-मन गान है,
अब घर के भीतर शत्रुओं को मारने वाला मेरा हिंदुस्तान हैं,
# ️दिप्तेश तिवारी
परिचय
नाम:-दिप्तेश तिवारी
पिता :-श्री मिथिला प्रसाद तिवारी(पुलिस ऑफिसर)
माता:-श्रीमती कमला तिवारी (गृहणी)
शिक्षा दीक्षा:-अध्यनरत्न 12बी ,स्कूल:-मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल रीवा 
परमानेंट निवास:-सतना (म.प्र)
जन्म स्थल:-अरगट 
प्रकाशित रचनाए:-देश बनाएं,मैं पायल घुँगुरु की रस तान,हैवानियत,यारी,सहमी सी बिटिया,दोस्त,भारत की पहचान आदि।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।