पशुपालन

0 0
Read Time2 Minute, 36 Second
 rajendra anekant
पुराने इतिहास की सम्पन्नता का यही प्रमाण है कि आज भी हमारे देश के संबंन्ध मे कहा जाता है और हमारी एक कविता की भी यही पक्तियाँ है कि यहाँ:-
घर घर मे गैंया पलती थी
दूध की नदियाँ बहती थी
हर घर मे दूध पिया जाता
गौधन को नित पूजा जाता
परन्तु आज पशु नही बचे किन्तु
दूध उत्पाद तो मिठाई घी क्रीम आदि अनेक प्रकार के
जो कि दूध के अभाव मे जहर मिले बन रहै हैं और बच्चे बूड़े बेमोत मर रहे हैं और किसान मिट रहा वो अलग अतः स्वयं सिद्ध है कि पशुपालन के बिना विकास असंभव है इसी बात को हमने आल्हा छंद मे कहने का प्रयास किया है छंद मे कमी हो सकती है किन्तु हमारे विचारों से असहमति तो नही…
देखिए सादर…..
आज देश की हालत देखो,
जहर मिलो सब खाँय अनाज।
असाद्ध रोग से पीड़ित किन्तु,
चेते फिर भी नही समाज।।
पशुअन की हत्या करवा कैं,
पापी अधम बने सरताज।
भ्रष्टाचारी लूटामारी,
तो भी कहलाते महाराज।।
पशुपालन आधार सँभालो,
देखो कैसे खिसकत जाय।
देशी खाद कहाँ से मिल्हे,
पशु आवादी कमतर भाय।।
पशु बिना नई कोंनउ चारा,
खूब बनाओ चारागाह।
घर घर गैया भैंस पालिए,
यदि तुमको है कछु परवाह।।
बेरुजगारी कैंसें फैली,
थोड़ो तो रे करो विचार।
किसान पुत्र सब खाली बैठे,
खेती सें रय हाँथ पसार।।
एकई एकड़ खेती हो पर,
उतनई घास लियो उगाय।
दस दस गैयाँ भैंस पलेंगी,
तब किसान की दुगनी आय।।
दूध अकेलो नहि बेंचो तुम,
खुदी बनाव दूध उत्पाद।
क्रीम रबड़ी घी मिठाई सब,
समझो हुईयो तब आवाद।।
गोबर गैया मूत्र  संगमें,
बोनस समझो भैया यार।
नौकर बनकैं का पाओगे,
पशुअन सैं तो अपरंपार।।
पुरा कथाएँ अपनी देखो,
पशु कहाते थे भगवान।
कय कैं उनसे चले जीविका,
जीसें धरम करम इंसान।।
आखिर लिखें कहाँ लो भैया,
अपनी इतनई सीमा जान।
भारत महिमा तो अनंत रे,
‘अनेकांत’कवि तो नादान।।
#राजेन्द्र’अनेकांत’

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

लो आ गया बसंत 

Mon Dec 31 , 2018
लो आ गया बसन्त, मौसम में आई बहार | कर्णप्रिय वीणा झंकार || लो आ गया बसन्त, फूल हुठी पीली सरसों | गोरी का चंचल मन हर्षो || लो आ गया बसन्त, पतझड़ सारा बीत गया | पुष्प सुगंधित खिल गया || लो आ गया बसन्त, बंद ज्ञान चक्षु खोल […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।