बारिश*

aditi rusiya
आज सुबह से ही मूसलाधार बारिश हो रही थी । बच्चे घर पर ही थे । दोपहर का समय था बच्चों के साथ रिया बैठी बारिश का आनंद ले रही थी । अचानक ही किसी गहरे ख़्याल में खो सी गई । आँखो से अनायास ही आँसू छलक पड़े ।रितु ने पूछा माँ माँ कहाँ खो गईं !
कुछ नहीं बेटा यूँ ही । नहीं माँ कुछ तो है बोलो न ।

बेटे अनय ने कहा ज़रूर नाना जी के विषय में ही सोच रही होंगी । क्यों हैना माँ सही कहा न । रिया मुस्कुराए बिना न रह पाई बोली हाँ ! कितने अच्छे से समझता है तू अपनी माँ को । फिर यादों में खोई रिया ने अपने पापा के बारे में बताना शुरू किया ।

जब हम छोटे थे न और ऐसी बारिश होती तो तुम्हारे नाना शुद्ध घी में फूटे चने सिकवाया करते और सोफ़े पे बैठ कर पानी का आनंद लिया करते थे ।फिर हम सभी अठ्ठु खेला करते थे । जब हमारी दादी आतीं तो वो और नाना जी मिलकर बहुत चिटिंग किया करते थे । बचपन में हमलोगों ने बहुत खेल खेले ।  आजकल कोई नहीं खेलता ।

हमलोग एक लोहे की सलाख़ लिया करते थे जैसे ही पानी बंद होता हम सभी मोहल्ले के बच्चे इकट्ठा हो लोहे की छड़ को दूर फेंकते जिसकी जितनी दूर जाती वो जीत जाया करता । जब पानी गिरता तो घर पर ही कौड़ी और पत्ते खेला करते थे । साथ ही गरमा गरम भजिए ,फूटे चने , मूँगफली खाते । उस समय कुछ अलग ही माहौल हुआ करता था । आजकल तो किसी के पास इतना वक़्त ही नहीं होता ।जमाना हो गया बेटा पता नहीं याद भी नहीं है हमने वो चने कब खाए थे और कब ये खेल खेले थे । नाना नरम नरम भुट्टे लाते कढाई में कोयला सिलग़ाते और हमें सेंक कर दिया करते थे ।

रितु उठी उसने कहा चलो माँ आज हम नाना जैसे ही चने बनाते हैं । पापा भी दफ़्तर से आते होंगे फिर सब मिलकर आज चने खाएँगे और पत्ते खेलेंगे । भैया तुम भाभी को भी बुला लाओ । भाभी से कहना माँ के लिए गरमा गरम पकौड़े बना लाए। धत पगली ! पापा की डाँट खानी है क्या ? क्यों भाई क्याहुआ ! कुछ नहीं पापा बताती हूँ , कहते हुए रितु ने सारी बातें रमेश को बता दी । चलो भाई नीता पत्ते लेकर आओ आज हम सभी साथ मिलकर पकौड़े और पत्तों का आनंद लेंगे ।
*प्राकृतिक बरसात ही अच्छी लगती है तुम्हारी माँ की आँखे तो बस मुस्कुराती हुई ही अच्छी लगती हैं*

#अदिति रूसिया
वारासिवनी

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।