कृतज्ञता ज्ञापित करें सदा परमात्मा के नाम, जिसने हमें जीवन दिया वह परमात्म सदा महान। पैदा होते ही मिल गई माँ परमात्म रूप मिलता जहां, सांस लेने को मुफ़्त हवा पीने को मिलता मुफ़्त पानी। प्रकृति रूप में मिली सौगात प्रभु तेरी अदभुत कहानी। फल दिए,फूल दिए और दिया अन्न […]

दहेज के लोभियों को कोई कहाँ तक है रोके, क्योंकि जिन्होंने नियम बनाए सबसे पहले वो ही इन्हें तोड़े। दहेज को वे दहेज नहीं शिष्टाचार हैं समझते, कहते बिना कुछ दिए बेटी को विदा नहीं करते। कई तरह के बहाने इनके पास होते हैं, लेन-देन करने के तरीके इनके कुछ […]

सीफर से तो शुरु भयो,            पहाड़ जैसा पाय। सम विषमाभाज अभाज,           संबंधी बन जाय॥ लाभ हानि के अंक में,          जीवन बना गणित। आयु तो नित घट रही,       अनुभव जुड़ता मीत॥ गुणा-भाग दिन-रात से, […]

सूर्य को दीपक दिखाया जा रहा है, कद अंधेरे का बढ़ाया जा रहा है। उसकी हालत देखकर आया हूँ मैं, दूध चम्मच से पिलाया जा रहा है। जैसे कोई भेड़ बकरा मर गया , इस कदर मातम मनाया जा रहा है। रो रहे मुर्दे पड़े शमशान में, आदमी जिंदा जलाया […]

चितवत चकित चारू चित चंचल, अकथ अलौकिक अदभुत अंचल चहुंदिशि चितवत चितवनि चंचल, घूंघट पट तर दृग-मृग चंचल, चंचल वारि पवन अति चंचल, चंचल शुद्ध सरस सरिता-जल पीपर-पात सदृश मन चंचल, जीवन भर चंचल दृग-अंचल। दिव्य रश्मि रथ रवि का चंचल, चंचल कवि की कविता चंचल हिरणी जैसी काया चंचल, […]

   दरकती नींवों पर रिश्तों की मीनार खड़ी देखी है, हमने बुलंदियों पे खड़ी दीवार गिरती देखी है। जिनकी सूरत में अपनी सीरत बनती देखी है, उन्हीं के इक वार से रग-रग टूटती देखी है। छल-कपट पर चढ़ी विश्वास की चादर देखी है, हमने सपनों के महलों की मीनार गिरती […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।