भाँपकर उसके ईरादे को हवा का रूख बदलते देखा देशहित करने वालो को तूफानों में भी लड़ते देखा। चंद मिनटो में ही उस्ताद समझने की भूल मत करना ये शेरों की वस्ती है गीदरो को अपने पास रखना। कश्मीर कश्मीर करता है उसे हिन्द की मुकुट समझना उन्माद की फैक्ट्री […]
काव्यभाषा
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